विजय चांदा की मौत ने उनके बड़े भाई गजराज सिंह को भीतर तक तोड़ दिया है। भाई के जाने का गम इतना गहरा है कि खुद को संभाल नहीं पा रहे। रोते-रोते हाथों से सिर पीटने लगते हैं और कहते हैं, ‘मेरा प्यारा भाई मुझे छोड़कर चला गया। मैं उसे सीने से लगाकर रखता था।’
गजराज सिंह बताते हैं कि दोनों भाइयों के बीच गहरा लगाव था। जब भी समय मिलता, खेत पर लगी समर के पास दोनों भाई बैठते थे। वहीं खेती-किसानी की बातें होतीं और एक-दूसरे से अपने सुख-दुख बांटते थे। अब वही जगह और भाई के साथ बिताए पल उनकी आंखों के सामने हैं।
‘जब भी समय मिलता था, हम दोनों समर के पास बैठकर अपना सुख-दुख बांटते थे। मेरा भाई मुझे छोड़कर चला गया।’ इतना कहते-कहते गजराज फिर फफक पड़े। पास खड़े विजय के नाती यश को उन्होंने अपने सीने से लगा लिया। शायद भाई की कमी और यश के सिर से उठे बाबा के साये का दर्द उस पल एक साथ उमड़ आया था।