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भारत मंडपम में 5वें दिन सजी ‘नाइट ऑफ ऑनर्स’, आईएफएफडी 2026 ने रचा सिनेमा और संस्कृति का भव्य संगम

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दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ दिल्ली (आईएफएफडी) 2026 अपने पांचवें दिन एक शानदार ‘नाइट ऑफ ऑनर्स’ के साथ नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया. इस खास शाम ने सिनेमा, संस्कृति और उत्सव को एक मंच पर लाकर राजधानी को एक वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मजबूत संदेश दिया.

दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी ने बढ़ाई शाम की गरिमा

कार्यक्रम की भव्यता उस समय और बढ़ गई जब मुख्य अतिथि के रूप में उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा और फेस्टिवल डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा मंच पर मौजूद रहे. इन प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति ने इस आयोजन के महत्व और दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान को नए आयाम देने के संकल्प को दर्शाया.

दिल्ली को सांस्कृतिक राजधानी बनाने की दिशा में पहल

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि दिल्ली सिर्फ देश की राजधानी नहीं, बल्कि विविधता और संभावनाओं का केंद्र है. उन्होंने इस महोत्सव को नई सांस्कृतिक पहचान गढ़ने वाला मंच बताते हुए कहा कि सिनेमा लोगों को जोड़ने और प्रेरित करने की ताकत रखता है. उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और नए कलाकारों के लिए इस मंच को अवसरों का द्वार बताया.

पर्यटन और फिल्म शूटिंग के लिए वैश्विक हब बनाने की तैयारी

पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि आईएफएफडी की परिकल्पना को सरकार ने गंभीरता से साकार किया है. उनका लक्ष्य दिल्ली को न सिर्फ राजनीतिक, बल्कि सांस्कृतिक और फिल्म निर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है.

दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान को मिली नई मजबूती

उपराज्यपाल ने इस आयोजन को दिल्ली की विकसित होती सांस्कृतिक छवि का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि इस मंच ने देश-विदेश के कलाकारों और दर्शकों को एक साथ लाकर रचनात्मक ऊर्जा को नई दिशा दी है.

सिनेमा से आगे बढ़कर भावनाओं का उत्सव बना आईएफएफडी

फेस्टिवल डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने कहा कि यह महोत्सव सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन भावनाओं और संवादों का उत्सव है जो सिनेमा पैदा करता है. दर्शकों की भारी भागीदारी ने इस बात को साबित किया कि सिनेमा आज भी लोगों को जोड़ने की ताकत रखता है. वहीं संगीतकार रिकी केज की प्रस्तुति ने माहौल को और भावपूर्ण बना दिया.

सम्मानों में दिखी सिनेमा की विविधता और वैश्विक पहचान

इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित हस्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किया गया. सिंगापुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के प्रतिनिधिमंडल की सराहना की गई, वहीं फिल्म ‘शोले’ के 50 वर्ष पूरे होने पर रमेश सिप्पी को विशेष सम्मान दिया गया. एनरिक आर्से सहित अंतरराष्ट्रीय हस्तियों की मौजूदगी ने आयोजन को वैश्विक पहचान दी.

भारत मंडपम में 5वें दिन सजी ‘नाइट ऑफ ऑनर्स’, आईएफएफडी 2026 ने रचा सिनेमा और संस्कृति का भव्य संगम

नई तकनीक और उभरती प्रतिभाओं को मिला मंच

‘एआई फिल्ममेकिंग हैकाथॉन’ के जरिए नई तकनीकों और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया गया. ‘कैपिटल्स प्राइड’ श्रेणी में गुनीत मोंगा, टी.पी. अग्रवाल और दिव्या दत्ता को सम्मान मिला, जबकि भूमि पेडनेकर को ‘एक्टर विद अ मिशन’ के रूप में सराहा गया.

बेहतरीन फिल्मों और कलाकारों को मिला सम्मान

फिल्म ‘सैयारा’ को ‘पाथब्रेकिंग फिल्म ऑफ द ईयर’ और ‘सितारे जमीन पर’ को ‘मोस्ट इंस्पायरिंग फिल्म ऑफ द ईयर’ चुना गया. ‘तन्वी द ग्रेट’ के लिए अनुपम खेर को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और शुभांगी दत्त को सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता का सम्मान मिला. ‘धुरंधर’ के लिए रणवीर सिंह और आदित्य धर को भी प्रमुख पुरस्कार मिले.

मास्टरक्लास और चर्चाओं ने जोड़ी बौद्धिक गहराई

दिनभर आयोजित सत्रों में दर्शकों की भारी भागीदारी देखने को मिली. दिव्या दत्ता, श्रिया पिलगांवकर और श्वेता बसु प्रसाद ने ओटीटी में महिलाओं की भूमिका पर महत्वपूर्ण चर्चा की. अनुपम खेर की मास्टरक्लास ने अभिनय के मूल तत्वों और जीवन के अनुभवों के महत्व को रेखांकित किया.

भूमि पेडनेकर ने साझा किया संघर्ष और सफलता का सफर

भूमि पेडनेकर ने अपने करियर के शुरुआती संघर्षों और सिनेमा के प्रति अपनी सोच को साझा किया. उन्होंने दर्शकों से सार्थक फिल्मों को समर्थन देने की अपील की और इंडस्ट्री में सकारात्मक माहौल की जरूरत पर जोर दिया.

विविध फिल्मों की स्क्रीनिंग ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

फेस्टिवल में विभिन्न भाषाओं और विषयों की फिल्मों ने दर्शकों को आकर्षित किया. अहिल्या: झुंज एकाकी, नेने राजू नेने मंत्री और माँ जाए जैसी फिल्मों ने अलग-अलग कहानियों के जरिए गहरी छाप छोड़ी. शोले की स्क्रीनिंग में उमड़ी भीड़ ने इसकी लोकप्रियता को फिर साबित किया.

समापन की ओर बढ़ता उत्सव, उम्मीदों का चरम

31 मार्च को फेस्टिवल अपने अंतिम दिन में प्रवेश कर गया, जहां समापन फिल्म ‘अमीबा’ और खास चर्चाओं के साथ कार्यक्रम को यादगार बनाने की तैयारी है. राकेश ओमप्रकाश मेहरा और इम्तियाज अली जैसे फिल्मकारों की बातचीत ने सिनेमा के भविष्य पर नई दृष्टि दी.

सिर्फ फिल्म नहीं, यादगार अनुभव बना आईएफएफडी

आईएफएफडी 2026 ने यह साबित कर दिया कि यह महोत्सव केवल फिल्मों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि यादों और अनुभवों का निर्माण भी करता है. जैसे-जैसे यह अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, यह दर्शकों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ता जा रहा है.



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