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Xप्लेन: नेपाल-तिब्बत में कहां-कहां से गुजरी मौत की लहर? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा

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26 अगस्त 2026 को नेपाल के रसुवा जिले में लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त थे. तभी सुबह 8:37 बजे पहाड़ों से एक ऐसी आवाज आई जिसने सब कुछ बदल कर रख दिया. यह भूकंप नहीं था. यह एक विशाल ग्लेशियर के ढहने की आवाज थी. इसके बाद जो हुआ, उसे ‘हिमालयी सूनामी’ कहा जा रहा है. यह 2015 के भयानक भूकंप के बाद नेपाल की सबसे बड़ी आपदा है. तो आइए सैटेलाइट इमेजरी के जरिए इस त्रासदी के हर पहलू को समझते हैं…

यह त्रासदी शुरू होने की सबसे ठोस वजह क्या पता चली?

नेपाल के विदेश मंत्री ने शुरुआत में कहा कि बाढ़ से पहले बॉर्डर पर भूकंप आया था. लेकिन अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) की रिपोर्ट ने यह साफ किया कि वह भूकंप नहीं था. वह ग्लेशियर के ढहने से पैदा हुई ऊर्जा थी.

नेपाल के स्थानीय अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि एक विशाल ग्लेशियर का हिस्सा टूटकर गिरा था. इसकी वजह से भारी मात्रा में बर्फ और मलबा नीचे की ओर बहा. USGS ने इसे ‘ग्लेशियल कोलैप्स एंड डेब्रिस फ्लो’ (ग्लेशियर ढहना और मलबे का बहाव) करार दिया. इस बहाव ने नदियों को अस्थायी रूप से रोक दिया और फिर जब यह ब्लॉकेज टूटा, तो पानी की एक विशाल दीवार ने घाटियों में तबाही मचा दी.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस आपदा की जड़ ग्लोबल वॉर्मिंग है. बढ़ते तापमान के कारण हिमालय के ग्लेशियर कमजोर हो रहे. यह किसी एक घटना का अंत नहीं, बल्कि एक बढ़ती हुई चेतावनी है.

बाढ़ का रास्ता: कहां-कहां हुई तबाही?

सैटेलाइट इमेजरी के जरिए इस बाढ़ के पूरे रास्ते को ट्रेस किया गया

Xप्लेन: नेपाल-तिब्बत में कहां-कहां से गुजरी मौत की लहर? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा

नेपाल बाढ़ में अब तक कितनी तबाही हुई?

नेपाल पुलिस के मुताबिक, 28 अगस्त तक 475 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. 900 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं. लापता लोगों में शामिल हैं:

  • भारत से 178 पर्यटक
  • नेपाल से 127 पर्यटक
  • अमेरिका से 65 पर्यटक
  • ब्रिटेन से 33 पर्यटक
  • दर्जनों नेपाली सेना और पुलिसकर्मी

चीनी मीडिया के मुताबिक, तिब्बत में 3 लोगों की मौत और 558 से ज्यादा लोग लापता हैं. यह स्पष्ट नहीं है कि ये आंकड़े नेपाल के आंकड़ों से ओवरलैप तो नहीं होते.

कुल मिलाकर दोनों तरफ मिलाकर 1,400 से ज्यादा लोग लापता हैं. 400 से ज्यादा की मौत हो चुकी है.

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सबसे बड़ा खतरा दूसरी बाढ़ की चेतावनी!

नेपाल और चीन के एक्सपर्ट्स और इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) ने चेतावनी दी है कि:

  • बाढ़ से नदियों में भारी मलबा जमा हो गया है.
  • त्रिशूली नदी के संकरे हिस्सों में यह मलबा अस्थायी बांध बना सकता है.
  • अगर यह बांध टूटा, तो फिर से पानी की दीवार उतरेगी.

चीनी अधिकारियों ने इसी डर से तिब्बत साइड पर बचाव अभियान रोक दिया है. नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के दोनों ओर दो बड़े झीलनुमा जलाशय बन गए हैं जिनके फटने का खतरा है. रेड क्रॉस के अधिकारी ने कहा कि बचावकर्मी ‘तनाव में’ हैं क्योंकि कोई नहीं जानता कि दूसरी बाढ़ कब आ सकती है.

क्यों ये घटना दुनिया के लिए चेतावनी है?

हिमालय दुनिया का ‘थर्ड पोल’ कहलाता है. यहां ध्रुवों के बाद सबसे ज्यादा बर्फ जमी है. लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के कारण ये ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी घटनाएं बार-बार आएंगी. यह सिर्फ़ नेपाल या तिब्बत की समस्या नहीं है. यह पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी है.

ICIMOD और दूसरे विशेषज्ञ लगातार नदियों की निगरानी कर रहे हैं, लेकिन इस तरह की आपदाओं की भविष्यवाणी करना बेहद मुश्किल है.

एक ऐसी त्रासदी जो दुनिया को हिला दे

नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर 26 अगस्त 2026 को आई यह बाढ़ सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं है. यह जलवायु परिवर्तन का एक ख़तरनाक नतीजा है. एक तरफ 475 से ज्यादा शव, 1,400 से ज्यादा लापता और दूसरी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. दूसरी तरफ, हजारों बचावकर्मी रात-दिन मलबे में अपने लोगों को ढूंढ रहे हैं.

यह घटना पूरी दुनिया के लिए एक वैकअप कॉल है कि हिमालय पिघल रहा है और इसके साथ ही पूरे इलाके का भविष्य पिघल रहा है.


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