महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को बुनियादी मराठी सीखने के लिए एक साल का समय देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने चालकों को भाषा सीखने के लिए एक साल की मोहलत देने का निर्णय लिया है।
ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के संगठनों के प्रतिनिधियों ने हाजी अराफात शेख के नेतृत्व में मुख्यमंत्री फडणवीस से मुलाकात की। फडणवीस ने बताया कि प्रतिनिधियों ने इस नियम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चालक बुनियादी मराठी सीखने के लिए तैयार हैं। हालांकि, प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि चालक अलग-अलग उम्र के हैं। कई लोग वर्षों पहले औपचारिक पढ़ाई छोड़ चुके हैं। ऐसे में कम समय में मराठी सीखना उनके लिए मुश्किल है। उन्होंने सरकार से एक साल का समय देने की मांग की थी।
मामले से जुड़ी पांच बड़ी बातें
- ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए यह फैसला किया गया है।
- टैक्सी चालक भी इस फैसले के दायरे में होंगे।
- चालकों को मराठी सीखने के लिए एक साल की मोहलत मिलेगी।
- उन्हें बुनियादी स्तर की मराठी सीखनी होगी।
- इस फैसले की जानकारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दी।
पूरा मामला क्या है? पिछले कुछ दिनों में ऐसे बढ़ा विवाद
महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और कैब चालकों के लिए मराठी का कार्यसाधक ज्ञान अनिवार्य करने के फैसले के बाद विवाद तेज हुआ। 12 अगस्त के सरकारी आदेश और बाद में नियमों में बदलाव के तहत चालकों के लिए बुनियादी मराठी जानना जरूरी किया गया। नियम लागू होने के बाद जांच और नोटिस की कार्रवाई शुरू हुई। मामला तब ज्यादा गरमाया, जब क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों ने चालकों की मराठी समझ और बोलने की क्षमता की जांच शुरू की। जिन चालकों को पर्याप्त जानकारी नहीं थी, उन्हें नोटिस दिए गए। इससे गैर-मराठी भाषी चालकों में लाइसेंस पर कार्रवाई और रोजी-रोटी प्रभावित होने की चिंता बढ़ गई।
एक महीने की मोहलत
पहले व्यवस्था यह थी कि जिस चालक को नोटिस मिलता, उसे मराठी सीखने के लिए एक महीने का समय दिया जाता। इसके बाद भी शर्त पूरी नहीं होने पर लाइसेंस और बैज निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती थी। लगातार नियम का पालन नहीं करने पर लाइसेंस रद्द होने तक की कार्रवाई का प्रावधान बताया गया। इसी बीच सामने आया कि बड़ी संख्या में चालक प्रशिक्षण और परीक्षा की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए थे। कुछ चालक परीक्षा में असफल भी हुए। इससे यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया।
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मुंबई में ऑटो चालकों ने का हड़ताल और विरोध
24 अगस्त को मुंबई में ऑटो चालकों के एक वर्ग ने तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी। प्रदर्शन करने वाले चालकों का कहना था कि वे मराठी सीखने के विरोध में नहीं हैं, लेकिन कम समय में इसे सीखना मुश्किल है। खासकर अधिक उम्र और कम पढ़े-लिखे चालकों ने चिंता जताई कि भाषा की शर्त उनके काम पर असर डाल सकती है। कुछ चालकों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशिक्षण में बताए गए विषयों से अलग सवाल पूछे जा रहे हैं। वहीं, जुर्माने और कार्रवाई की आशंका को लेकर भी विरोध बढ़ा। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को स्पष्ट करना पड़ा कि तय मोहलत खत्म होने से पहले गलत तरीके से जुर्माना लगाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
फडणवीस ने पहले कहा था- विशेषज्ञ बनने की जरूरत नहीं
विरोध बढ़ने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि चालकों को मराठी का विशेषज्ञ बनने की जरूरत नहीं है। उन्हें केवल कामकाज के लिए जरूरी बुनियादी मराठी आनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भाषा के आधार पर किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, विरोध बढ़ने के बाद सीएम फडणवीस ने यह फैसला किया है।


