उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। जातीय समीकरणों को साधने के साथ अब महिला वोट बैंक भी सियासी दलों के एजेंडे में प्रमुखता से उभर रहा है। हाल के चुनावों में महिलाओं की बढ़ती चुनावी भागीदारी और उनके वोट से बदले समीकरणों ने पार्टियों को इस वर्ग को अपने पाले में लाने के लिए नई रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है।
हर दल की कोशिश महिला वोट बैंक को अपने पाले में लाने की है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने जहां बुधवार को फ्री बस सेवा की सौगात दी। वहीं, समाजवादी पार्टी ने इस मौके पर एक के बाद एक कई घोषणाएं कर डाली। इसमें सरकार बनने पर 40,000 रुपये की आर्थिक मदद का दावा भी किया गया है।
वहीं दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती दलित, पिछड़ा, अल्पसंख्यक और सवर्ण समाज को साथ लेकर सत्ता में वापसी की रणनीति पर आगे बढ़ती नजर आ रही हैं। सपा के नए दांव के बाद भाजपाई नेता से लेकर मंत्री उन पर हमलावर हैं, वो इसे महज छलावा बता रहे हैं। पढ़िए पूरा विश्लेषण…

