
Micro Break Trend: ऑफिस में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने से शरीर के साथ दिमाग भी थकने लगता है. लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में तनाव, गर्दन और कंधों में खिंचाव और काम के बीच सुस्ती महसूस हो सकती है. ऐसे में हर घंटे सिर्फ 2 मिनट का छोटा सा ब्रेक आपके लिए काफी मददगार हो सकता है. इसे ही ‘माइक्रो ब्रेक’ कहा जाता है.

क्या है 2 मिनट वाला माइक्रो ब्रेक?
माइक्रो ब्रेक का मतलब है काम के बीच में छोटा सा ब्रेक लेना. इसमें आपको 15-20 मिनट तक काम छोड़कर बैठने की जरूरत नहीं है. बस हर 30 से 60 मिनट के काम के बाद अपनी कुर्सी से उठें और करीब 2 मिनट तक थोड़ा चलें या शरीर को हल्का स्ट्रेच करें.
मसलन, आप अपनी सीट से उठकर पानी पी सकती हैं, ऑफिस में थोड़ा टहल सकती हैं या हाथ, कंधे और गर्दन की हल्की स्ट्रेचिंग कर सकती हैं. इतने छोटे ब्रेक से लगातार बैठे रहने का सिलसिला टूटता है.
सिटिंग जॉब में कैसे करता है मदद?
लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर में अकड़न और थकान महसूस हो सकती है. बीच-बीच में उठकर चलने-फिरने से शरीर को थोड़ी मूवमेंट मिलती है. साथ ही, काम से कुछ मिनट के लिए ध्यान हटाने से दिमाग को भी आराम मिलता है.
लगातार लैपटॉप या कंप्यूटर देखने वालों के लिए भी यह आदत अच्छी हो सकती है. ब्रेक के दौरान स्क्रीन से नजर हटाकर कुछ देर दूर देखने से आंखों को आराम मिल सकता है. इससे काम के बीच आने वाली सुस्ती कम करने और दोबारा फोकस करने में मदद मिल सकती है.
ऑफिस में ऐसे लें 2 मिनट का ब्रेक
- हर घंटे फोन या कंप्यूटर पर रिमाइंडर लगा लें.
- रिमाइंडर बजते ही कुर्सी से उठें.
- 1-2 मिनट ऑफिस में थोड़ा टहलें.
- गर्दन, कंधे और हाथों की हल्की स्ट्रेचिंग करें.
- पानी पीने के लिए खुद उठकर जाएं.
- ब्रेक के दौरान कुछ देर स्क्रीन से नजर हटाएं.
याद रखें, माइक्रो ब्रेक काम से भागने का बहाना नहीं है, बल्कि लंबे समय तक बैठे रहने के बीच शरीर और दिमाग को थोड़ी राहत देने का आसान तरीका है. अगर आपका काम ज्यादातर समय डेस्क पर बैठकर होता है, तो दिन में कई बार 2 मिनट का यह ब्रेक लेना एक अच्छी आदत बन सकती है.
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