टीकरी मेट्रो स्टेशन के पास सीएनजी पंप पर हुए भीषण ब्लास्ट ने ट्रांसपोर्ट कंपनियों की लापरवाही पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि कई ट्रांसपोर्टर खर्च बचाने के लिए सीएनजी सिलिंडरों का समय पर हाइड्रो टेस्ट नहीं कराते। इतना ही नहीं, कुछ कैंटर और ट्रकों में स्वीकृत संख्या से अधिक सिलिंडर लगाए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सीएनजी पंपों पर होने वाले ज्यादातर हादसों के पीछे खराब सिलिंडर, ओवरफिलिंग और सुरक्षा नियमों की अनदेखी प्रमुख कारण हैं।
टेस्टिंग और फिटिंग में बरती जा रही लापरवाही
सीएनजी सिलिंडर की निर्धारित वैधता 15 से 20 वर्ष तक होती है और हर तीन से पांच वर्ष में हाइड्रो टेस्ट कराना जरूरी होता है। इसके बावजूद कई ट्रांसपोर्टर खर्च बचाने के लिए इसकी अनदेखी करते हैं। जंग लगे, दरार वाले या टेस्ट में फेल सिलिंडर करीब 200-220 बार के दबाव को सहन नहीं कर पाते। ऐसे में उनमें रिसाव या फटने का खतरा बढ़ जाता है।
दूसरी बड़ी समस्या वाहनों में जुगाड़ से सिलिंडर लगाना है। आरोप है कि कई कंपनियां कम सिलिंडर की अनुमति लेकर वाहनों में आठ तक सिलिंडर लगवा देती हैं। स्थानीय मैकेनिक से वेल्डिंग, गैर-अधिकृत वाल्व और ढीले पाइप लगवाने से गैस रिसाव का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।
पंप पर भी होती हैं ये गलतियां
सुरक्षा में लापरवाही केवल ट्रांसपोर्टरों तक सीमित नहीं है। पंप पर भी कई बार गर्म सिलिंडर में गैस भरने की कोशिश की जाती है। धूप में खड़ा या लंबी दूरी से आया ट्रक गर्म हो सकता है। ऐसे में गैस भरने से सिलिंडर के भीतर दबाव बढ़ने का खतरा रहता है। इसके अलावा सीएनजी भरते समय इंजन चालू रखना, मोबाइल या सिगरेट का इस्तेमाल करना और नोजल को ठीक से लॉक नहीं करना भी जोखिम बढ़ाता है।
ऐसे बचें हादसे से
विशेषज्ञों के अनुसार सीएनजी भरवाते समय वाहन का इंजन बंद रखना चाहिए। मोबाइल और सिगरेट से दूरी रखनी चाहिए और गैस भरते समय ट्रक से तीन-चार मीटर दूर खड़ा होना चाहिए। सिलिंडर की टेस्टिंग की तारीख नियमित रूप से जांचनी चाहिए और केवल अधिकृत किट व उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहिए। गैस की गंध महसूस होने पर तुरंत फिलिंग रोक देनी चाहिए और आपात स्थिति में अग्निशमन विभाग को सूचना देनी चाहिए।
सीएनजी हवा से हल्की होती है और रिसाव होने पर ऊपर की ओर फैलती है, लेकिन बंद या सीमित जगह में थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। टीकरी हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी।


