छिंदवाड़ा के हरदुआ माल स्थित अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास में मंगलवार तड़के उस समय हड़कंप मच गया, जब यहां रहने वाले 11 आदिवासी छात्र करीब 4 बजे छात्रावास से निकलकर ग्राम ग्रेठिया पहुंच गए। सुबह-सुबह गांव पहुंचे छात्रों को देखकर ग्रामीण भी हैरान रह गए। छात्रों ने ग्रामीणों को छात्रावास में रहने के दौरान होने वाली कथित परेशानियों और अव्यवस्थाओं के बारे में बताया। इसके बाद ग्रामीणों ने अधिकारियों को सूचना दी, जिसके बाद छिंदवाड़ा से जांच टीम छात्रावास पहुंची।
ग्रामीणों ने छात्रों से की बातचीत
बताया जा रहा है कि 11 छात्र तड़के छात्रावास से निकलने के बाद ग्रेठिया पहुंचे थे। ग्रामीणों ने जब उनसे बातचीत की तो छात्रों ने छात्रावास में होने वाली परेशानियों की जानकारी दी। इस दौरान छात्रावास अधीक्षक के व्यवहार और वहां की व्यवस्थाओं को लेकर भी छात्रों ने अपनी बातें रखीं। छात्रों के छात्रावास से बाहर निकलने की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग की टीम मौके पर पहुंची और छात्रों के साथ ही छात्रावास से जुड़े लोगों से जानकारी ली।
रात में छात्रावास छोड़कर निकलना बना सवाल
घटना में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसी क्या स्थिति बनी कि छात्रावास में रहने वाले 11 नाबालिग छात्र रात के अंधेरे में करीब 4 बजे छात्रावास छोड़कर दूसरे गांव पहुंच गए। यदि छात्रों ने किसी परेशानी के चलते यह कदम उठाया है तो छात्रावास में उनकी सुरक्षा, निगरानी और देखरेख की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का कहना है कि मामले को सिर्फ सामान्य शिकायत मानकर खत्म नहीं किया जाना चाहिए। छात्रों ने जो भी बातें बताई हैं, उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
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छात्रों के बयान स्वतंत्र रूप से दर्ज कराने की मांग
ग्रामीणों और अभिभावकों ने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि छात्रों के बयान बिना किसी दबाव के अलग-अलग दर्ज किए जाएं, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। इसके साथ ही छात्रावास में विद्यार्थियों को मिलने वाले भोजन, रहने की व्यवस्था, साफ-सफाई, सुरक्षा, अनुशासन और अधीक्षक सहित अन्य कर्मचारियों के व्यवहार की भी जांच कराने की मांग की गई है।
जांच टीम ने शुरू की पड़ताल
मामले की सूचना मिलने के बाद छिंदवाड़ा से पहुंची जांच टीम ने छात्रावास का निरीक्षण किया और संबंधित पक्षों से जानकारी ली। छात्रों की ओर से बताई गई शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल 11 छात्रों का तड़के छात्रावास से निकलकर दूसरे गांव पहुंचना पूरे मामले को गंभीर बना रहा है। अब जांच में यह सामने आना बाकी है कि छात्रों ने छात्रावास छोड़ने का फैसला क्यों लिया और वहां की व्यवस्थाओं में वास्तव में कोई कमी थी या नहीं।


