भाजपा की नवीन राष्ट्रीय टीम में चुनाव के मुहाने पर खड़े यूपी की भागीदारी को तरजीह दी गई है। यही नहीं, टीम में पिछड़े, दलित और मुस्लिम समाज के प्रमुख चेहरों पर दांव भी लगाया गया है। साफ है कि भाजपा 2027 की जंग के लिए विपक्ष के पीडीए को ध्वस्त करने के हथियार सजाने में जुट गई है।
लंबे इंतजार के बाद घोषित भाजपा की राष्ट्रीय टीम में यूपी के आठ चेहरों को शामिल कर राज्य का सियासी संतुलन साधे रखने की कोशिश की गई है। इनमें उपाध्यक्ष, महामंत्री और मंत्री पद पर दो-दो लोगों तथा दो को अलग-अलग मोर्चों का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
एक तिहाई से अधिक यानी तीन महिलाओं को शामिल करके भाजपा ने बड़ी चाल चली है। पार्टी नेतृत्व ने छह महीने बाद यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण पर पार्टी की प्रतिबद्धता के प्रचार को विश्वसनीयता देने का आधार तैयार किया है।
भाजपा ने अगड़े, पिछड़े और दलित को प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक समीकरण साधने का प्रयास भी किया है। जातियों के संतुलन के लिहाज से देखें तो यूपी के आठ चेहरों में तीन ओबीसी (यादव, कुर्मी, मौर्य), एक ब्राह्मण, एक पारसी, एक दलित और दो मुस्लिम को जगह मिली है।


