दिल्ली और रांची के बाद अब पटना में अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं। गर्दनीबाग धरनास्थल पर दो अलग-अलग अभ्यर्थियों का गुट अनशन पर बैठा है। ‘ऑल Ph.D. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के बैनर तले अभ्यर्थी पिछले 13 दिनों से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं। वहीं ‘ऑल बिहार स्टूडेंट यूनियन (ABSU)’ ने बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर 13 सूत्री मांगें उठाई हैं। खास बात यह है कि इन दोनों गुटों के समर्थन में आज इनके साथ पूर्णिया सांसद पप्पू यादव एक दिवसीय उपवास पर बैठ गए हैं। पप्पू यादव अपने हाथ में भगत सिंह की तस्वीर लेकर बैठे हैं। उनका कहना है कि अभ्यर्थियों की मांग जायज है। सरकार को इनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करनी चाहिए और इस दिशा में साकारत्मक कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को इन अभ्यर्थियों की अगर चिंता है तो इनकी मांगों को जल्द से जल्द पूरा करे।
CGL, ASO और BSO समेत सभी लंबित परीक्षाओं को जल्द कराने की मांग
छात्र नेता सौरभ कुमार ने कहा कि हमलोग ऑल बिहार स्टूडेंट यूनियन के बैनर बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर 13 सूत्री मांगें उठाई हैं। हमलोगों की प्रमुख मांगों में 70वीं BPSC परीक्षा को पूरी तरह निरस्त करने की मांग करते हैं। इसके अलावा BSSC की ओर से आयोजित इंटरमीडिएट, CGL, ASO और BSO समेत सभी लंबित परीक्षाओं को जल्द आयोजित कराने की मांग की गई है। इसके अलावा TRE-4 भर्ती प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के साथ पूर्व की परीक्षाओं की तर्ज पर एक परीक्षा और ‘एक अभ्यर्थी, एक रिजल्ट’ व्यवस्था लागू करने की मांग करते हैं। वहीं, 1,799 पदों वाली दरोगा भर्ती परीक्षा को पूरी तरह निरस्त करने और परीक्षा समाप्त होने के बाद प्रश्नपत्र, उत्तर-कुंजी और OMR शीट अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। अभ्यर्थियों ने BPSC की ओर से आयोजित AED0 समेत विभिन्न रद्द परीक्षाओं की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
नई सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 का विरोध
वहीं शिक्षक कुंदन कुमार ने कहा कि हमलोग ‘ऑल Ph.D. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के बैनर तले पिछले 13 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं। लेकिन, एनडीए सरकर हमलोगों की बात नहीं सुन रही है। हमलोग बिहार सरकार की नई सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 का विरोध कर रहे हैं। नई नियमावली बिहार के छात्रों और शोधार्थियों के हित में नहीं है तथा इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी। अभ्यर्थियों ने कहा कि बिहार के विश्वविद्यालयों में करीब 30 वर्षों में केवल तीन बार सहायक प्राध्यापक की बहाली हुई है। ऐसे में स्थायी नियुक्ति के बजाय फिर संविदा आधारित नियुक्ति का प्रावधान उचित नहीं है। उन्होंने UGC के टेबल 3A के आधार पर स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की। अभ्यर्थियों ने कहा कि नई नियमावली में अधिकतम उम्र सीमा 55 वर्ष से घटाकर 40 वर्ष कर दी गई है। इससे वर्षों से अतिथि शिक्षक के रूप में कार्यरत अभ्यर्थियों के सामने अवसर खत्म होने का खतरा है। उन्होंने उम्र सीमा 55 वर्ष रखने की मांग की। इसके अलावा अभ्यर्थियों ने रिसर्च पब्लिकेशन के अंक हटाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि पिछली बहाली में UGC टेबल 3A के तहत रिसर्च पब्लिकेशन को 10 अंक दिए गए थे। संगठन ने नियमावली में संशोधन कर बिहार के अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने की मांग की है।

