अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए ओमान की खाड़ी में एक जहाज पर सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, पनामा के झंडे वाला यह जहाज ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी से बचने की कोशिश कर रहा था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि जहाज को रुकने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन उसने आदेश नहीं माना। इसके बाद अमेरिकी हेलीकॉप्टर ने जहाज के इंजन रूम में मिसाइलें दागीं, जिससे जहाज चलने में असमर्थ हो गया।
अमेरिका ने जहाज पर हमला क्यों किया?
अमेरिकी सेना के अनुसार, एमवी वेला नोवा नाम का जहाज ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि जहाज को रुकने के लिए चेतावनी दी गई थी, लेकिन उसने चेतावनी नहीं मानी। इसके बाद अमेरिकी हेलीकॉप्टर ने उसके इंजन रूम को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं। हमले के बाद जहाज निष्क्रिय हो गया। हालांकि, अमेरिकी सेना ने यह नहीं बताया कि जहाज पर मौजूद चालक दल के किसी सदस्य को नुकसान पहुंचा या नहीं।
ये भी पढ़ें- Oil Tariff: रूस से तेल खरीद पर 100% टैरिफ का खतरा, US अधिकारी बोले- पीएम मोदी और ट्रंप खुद सुलझाएंगे मामला
अमेरिका ने नाकाबंदी लागू करने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, उसने नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश करने वाले 55 वाणिज्यिक जहाजों का रास्ता बदलवाया है। इसके अलावा तीन ऐसे जहाजों को निष्क्रिय किया गया, जिन्होंने अमेरिकी आदेशों का पालन नहीं किया। दो जहाजों पर अमेरिकी सेना ने सवार होकर कार्रवाई भी की है। इससे साफ है कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकाबंदी को लागू कराने के लिए सैन्य दबाव लगातार बढ़ा रहा है।
अरब सागर में अमेरिका की कितनी सैन्य ताकत मौजूद है?
अमेरिकी नौसेना के 15 से अधिक युद्धपोत फिलहाल अरब सागर के आसपास के समुद्री क्षेत्र में तैनात हैं। इनमें दो विमानवाहक पोत और एक उभयचर हमला करने वाला जहाज भी शामिल है। यह सैन्य तैनाती ऐसे समय में है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। ओमान की खाड़ी में जहाज पर हुई कार्रवाई से संकेत मिलता है कि ईरान पर दबाव सिर्फ आर्थिक और राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री मार्गों पर भी अमेरिकी निगरानी और कार्रवाई तेज हो गई है।


