अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव से निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं। संघर्ष को खत्म करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोल देता है तो अमेरिकी प्रशासन परमाणु मुद्दे को अलग रखकर जीत की घोषणा कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप पिछले कुछ हफ्तों से इस नतीजे की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने अपने वरिष्ठ सहयोगियों से निजी तौर पर कहा है कि वह तेहरान के साथ औपचारिक परमाणु समझौता किए बिना भी पीछे हट सकते हैं। हालांकि, इस फैसले के लिए सम्मानजनक रास्ता निकालना मुश्किल हो गया है।
ईरान ने कैसे बढ़ाई अमेरिका की चिंता?
ईरान ने महत्वपूर्ण जलमार्ग से आवाजाही बहाल करने के बदले कई बड़ी मांगें रखी हैं। इनमें अरबों डॉलर का भुगतान, अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की पूरी वापसी और अन्य बड़ी रियायतें शामिल हैं। इन मांगों से अमेरिका के कूटनीतिक विकल्प सीमित हो गए हैं।
इससे यह चिंता भी बढ़ी है कि ईरान जल्द समझौते के बजाय लंबे समय तक टकराव के लिए तैयारी कर रहा है। ईरान ने मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं के जरिए इस संकरे समुद्री मार्ग से होने वाले यातायात को प्रभावित करने की क्षमता दिखाई है। इससे वैश्विक वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही धीमी हुई है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है।
होर्मुज पर ईरान ने कैसा बनाया दबदबा?
हाल के हफ्तों में ट्रंप बार-बार दावा करते रहे हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला है। हालांकि, ये दावे सिर्फ दावे ही साबित हुए हैं। फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग को बंद कर दिया था। उसका कहना था कि अमेरिकी युद्धपोतों और सहयोगी देशों के जहाजों को यहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। ईरान ने वाणिज्यिक जहाजों पर टोल लगाने की भी कोशिश की।
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि वॉशिंगटन ने ईरान की होर्मुज में पाबंदियों और टोल लगाने की किसी भी कोशिश को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। सप्ताहांत में संयुक्त अरब अमीरात की ओर से यह घोषणा किए जाने के बाद कूटनीतिक समाधान की उम्मीद और कमजोर हुई कि ईरान ने उसके एक जहाज पर मिसाइल हमला किया है।
ईरान ने होर्मुज खोलने के लिए रखी क्या शर्तें?
इसी दौरान ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बघेर जुलघदर ने जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए कई शर्तें रखीं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, जुलघदर ने कहा कि अमेरिका को युद्ध स्थायी रूप से खत्म करना होगा, अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटानी होगी और अमेरिकी सैन्य बलों को क्षेत्र से वापस बुलाना होगा। इसके अलावा सभी प्रतिबंध हटाने, ईरान की जमी हुई वित्तीय संपत्तियां जारी करने और युद्ध क्षतिपूर्ति का भुगतान करने की भी मांग की गई।
उन्होंने अमेरिका से धमकियां और अपमानजनक बयान बंद करने के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में ईरान से जुड़े मिलिशिया के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पूरी तरह रोकने की भी मांग की।
ट्रंप के लिए होर्मुज खुलवाना क्यों अहम?
अमेरिका में होने वाले आगामी मध्यावधि चुनाव भी वॉशिंगटन के लिए समाधान तलाशने की वजह बन रहे हैं। घरेलू पेट्रोल की कीमतें युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में काफी ऊंची बनी हुई हैं। ऐसे में प्रशासन अमेरिकी मतदाताओं को यह दिखाने के लिए एक ऐसा ढांचा तलाश रहा है, जिससे साबित किया जा सके कि सैन्य अभियान अपने लक्ष्य हासिल कर चुका है।
हाल के दिनों में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि वह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य हमला करने के लिए तैयार थे, लेकिन अमेरिकी सहयोगियों ने उन्हें ऐसा नहीं करने के लिए राजी किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के साथ समझौता जल्द होने वाला है। हालांकि, अब तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है। शुक्रवार को ट्रंप ने यह संकेत भी दिया कि परमाणु समझौते के बिना ही जीत हासिल की जा चुकी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें “डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध जीत लिया” शीर्षक वाले लेख का लिंक था।
जेडी वेंस के बयान से मिले क्या संकेत?
अमेरिकी प्रशासन के रुख पर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वॉशिंगटन ईरान पर दबाव बनाए रखेगा, ताकि दोनों देशों के संबंधों में लंबे समय के लिए संरचनात्मक बदलाव सुनिश्चित किए जा सकें। वेंस ने कहा, “और अगर ऐसा नहीं होता है, तो यह भी ठीक है। हम बस वह दबाव बनाए रखेंगे जो हम बना सकते हैं और मध्य पूर्व से जितना संभव हो उतना तेल और गैस निकालेंगे, ताकि अमेरिकी कम गैस और ऊर्जा कीमतों का लाभ उठा सकें।” उन्होंने कहा, “हम अभी खेल के बीच में हैं।”
परमाणु विवाद बना तनाव की बड़ी वजह
अप्रैल से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में परमाणु विवाद प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। उस समय व्हाइट हाउस ने चेतावनी दी थी कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति कभी नहीं दी जाएगी। शुरुआत में अमेरिका परमाणु प्रतिबद्धताओं को व्यापक द्विपक्षीय समझौते में शामिल करना चाहता था। हालांकि, जटिल बातचीत के बाद व्हाइट हाउस ने अपना ध्यान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर केंद्रित करना शुरू कर दिया।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ट्रंप ने हाल के हफ्तों में वरिष्ठ सहयोगियों से निजी तौर पर कहा कि मई 2025 में ईरान की तीन प्रमुख परमाणु सुविधाओं को अमेरिका द्वारा नष्ट किए जाने के बाद ईरान उनके राष्ट्रपति कार्यकाल में अपना परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू करने में सक्षम नहीं हो सकता है।
ट्रंप क्यों कर रहे ईरान की परमाणु क्षमता खत्म होने का दावा?
ट्रंप ने आंतरिक बैठकों में तर्क दिया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां तेहरान की ओर से इन ठिकानों को फिर से बनाने या गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित करने की किसी भी कोशिश का तुरंत पता लगा लेंगी। उनका मानना है कि अमेरिका की ओर से फिर से सैन्य कार्रवाई का खतरा लंबे समय तक रोकथाम का काम करेगा। ट्रंप ने ईरान के भूमिगत समृद्ध परमाणु पदार्थ को लेकर चिंताओं को भी कम करके बताया है।
इस रणनीतिक सोच से वॉशिंगटन के लिए औपचारिक परमाणु समझौते की मांग से पीछे हटना संभव हो सकता है, अगर जलडमरूमध्य से समुद्री आवाजाही पूरी तरह बहाल हो जाती है और परमाणु खतरा प्रभावी रूप से नियंत्रण में रहता है। हालांकि, वित्तीय मांगें किसी भी संभावित समझौते में बड़ी बाधा बनी हुई हैं। तेहरान युद्ध में हुए नुकसान के लिए अरबों डॉलर और विदेशों में मौजूद अपनी वित्तीय संपत्तियों को फिर से जारी करने की मांग कर रहा है।
कहां फंस रहा पेंच?
ट्रंप पहले कह चुके हैं कि उनका प्रशासन अमेरिकी करदाताओं का पैसा ईरान को नहीं देने देगा। हालांकि, द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि अगर वॉशिंगटन कुछ ईरानी संपत्तियों को तय शर्तों के तहत जारी करने पर सहमत नहीं होता है तो समझौता करना संभव नहीं हो सकता।
एक अन्य विवाद प्रतिबंधों में संभावित छूट को लेकर है। इसके तहत ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की बिक्री फिर से शुरू करने की अनुमति मिल सकती है। वॉशिंगटन ने इससे पहले अंतरिम संघर्षविराम के तहत ऐसी छूट दी थी। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर ईरानी हमलों के बाद संघर्षविराम टूट गया और अमेरिका ने ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े प्रतिबंध फिर से पूरी तरह लागू कर दिए।
इस वजह से यह मुद्दा इस बात से भी जुड़ा हुआ है कि अमेरिकी प्रशासन ऐसा समझौता तैयार कर पाता है या नहीं, जिसमें घरेलू राजनीतिक मुश्किलें पैदा किए बिना युद्ध की समाप्ति की घोषणा की जा सके।

