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‘बांग्लादेश दूसरा पाकिस्तान’, शेख हसीना के बेटे ने भारत के लिए क्या कहा?

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करीब दो साल पहले सत्ता से हटने और देश छोड़ने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आईं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दावा किया कि देश में दोषी आतंकवादियों को रिहा किया जा चुका है. वहीं, उनके बेटे और पूर्व सलाहकार सजीब वाजेद जॉय ने कहा कि बांग्लादेश अब “दूसरा पाकिस्तान” बन गया है और यह भारत के लिए भी चिंता का विषय है. नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोनों ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर कई गंभीर आरोप लगाए.

दो साल बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आईं शेख हसीना

शेख हसीना ने नई दिल्ली में फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया के कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया. सत्ता से हटने और निर्वासन में जाने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक संबोधन था. उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश में दोषी आतंकवादियों को रिहा कर दिया गया है.

सजीब वाजेद जॉय बोले- ‘बांग्लादेश दूसरा पाकिस्तान बन गया’

शेख हसीना के बेटे और पूर्व आईसीटी सलाहकार सजीब वाजेद जॉय ने कहा कि बांग्लादेश अब “दूसरा पाकिस्तान” बन गया है और यह स्थिति भारत के लिए भी चिंता का विषय होनी चाहिए. उन्होंने दावा किया कि मुहम्मद यूनुस के शासन में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है और देश एक “रोग स्टेट” बनने की ओर बढ़ रहा है.

जॉय ने आरोप लगाया कि शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद भी पुलिस हिरासत में मौतों का सिलसिला जारी है और 5 अगस्त 2024 से सरकार ने राजनीतिक हत्याओं को कानूनी संरक्षण दे दिया है.

मौतों के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल

सजीब वाजेद जॉय ने जुलाई-अगस्त 2024 के विरोध प्रदर्शनों में हुई मौतों के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने लगभग 1,400 लोगों की मौत की बात कही, जबकि सरकार ने 800 मौतें बताईं. उन्होंने सवाल किया कि बाकी 600 लोग कौन थे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपियों को अभूतपूर्व कानूनी संरक्षण दिया गया, जिससे उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चल सका. साथ ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया से सत्ता परिवर्तन के बाद हुई हिंसा की स्वतंत्र जांच करने की अपील की.

पूर्व खुफिया अधिकारी ने 2004 के ग्रेनेड हमले का किया जिक्र

पूर्व बांग्लादेशी राजनयिक और खुफिया अधिकारी अमीनुल हक पोलाश ने कहा कि 21 अगस्त 2004 को अवामी लीग की रैली पर ग्रेनेड हमला किया गया था, जिसका मकसद शेख हसीना और पार्टी नेतृत्व की हत्या करना था. उन्होंने बताया कि इस हमले में 24 लोगों की मौत हुई थी और 300 से अधिक लोग घायल हुए थे.

’10 ट्रक हथियार बरामदगी’ का भी किया उल्लेख

अमीनुल हक पोलाश ने कहा कि 10 ट्रक हथियार बरामदगी मामले से यह साबित हुआ था कि बांग्लादेश का इस्तेमाल क्षेत्र में सक्रिय उग्रवादी संगठनों तक हथियार पहुंचाने के रास्ते के रूप में किया जा रहा था. उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन के तत्कालीन उच्चायुक्त अनवर चौधरी पर भी शाहजलाल दरगाह में हमला किया गया था. उन्होंने कहा, “जब मौजूदा सरकार कहती है कि उग्रवाद वापस नहीं आया है, तो मैं इससे सहमत नहीं हूं.”

चटगांव में पकड़ी गई थी हथियारों की बड़ी खेप

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2004 में बांग्लादेश पुलिस और कोस्ट गार्ड ने चटगांव बंदरगाह पर दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी अवैध हथियार खेपों में से एक को पकड़ा था. इस दौरान 10 ट्रक हथियार बरामद किए गए थे. जांच में आरोप था कि ये हथियार उस समय असम में सक्रिय उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) के लिए भेजे जा रहे थे.

2009 में दोबारा जांच, 2018 में सुनाई गई फांसी

2009 में सत्ता में लौटने के बाद शेख हसीना की अवामी लीग सरकार ने इस मामले की दोबारा जांच कराई. इसके बाद 2018 में बांग्लादेश की एक अदालत ने तत्कालीन गृह मंत्री लुत्फोज्जमान बाबर को हथियार तस्करी की साजिश में दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई. हालांकि, 14 जनवरी 2025 को बांग्लादेश हाई कोर्ट ने इस मामले में उन्हें बरी कर दिया, जिसके बाद उन्हें फांसी की सजा से राहत मिल गई.

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