बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में झटका लगने के बाद बिहार सरकार ने राज्य के सभी 38 जिलों में सवर्ण समाज से जुड़े मामलों के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का फैसला किया है। सरकार इसे प्रशासनिक सुधार बता रही है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे सवर्ण वोट बैंक को फिर से मजबूत करने की रणनीति माना जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि जिला स्तर पर सवर्ण समाज की शिकायतों के लिए इस तरह की व्यवस्था पहली बार बनाई जा रही है।
नोडल अधिकारी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) प्रमाणपत्र, जमीन विवाद, जातीय उत्पीड़न और अन्य शिकायतों के समाधान में मदद करेंगे। अब तक इन मामलों का निपटारा मुख्य रूप से पटना स्थित बिहार सवर्ण आयोग के स्तर पर होता था। आयोग के अध्यक्ष महाचंद्र सिंह के अनुसार, जिला स्तर पर व्यवस्था बनने से शिकायतों का तेजी से निपटारा हो सकेगा। इस फैसले की टाइमिंग को लेकर भी चर्चा है। बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों के तुरंत बाद इसकी घोषणा हुई है।
विपक्ष ने इसे चुनावी रणनीति बताया
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अपने पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक से मिले नाराजगी के संकेतों के बाद सामाजिक समीकरण साधने में जुटी है। विपक्ष ने इसे चुनावी रणनीति बताया है, जबकि सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। जातीय राजनीति के लिए चर्चित बिहार में इस फैसले को आगामी चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।


