ईरान ने इस्राइल के लिए जासूसी के आरोप में सोमवार को अपने दो और नागरिकों को फांसी दे दी। यह सजा ऐसे तनावपूर्ण समय में दी गई, जब ईरान पहले ही मुश्किल दौर से गुजर रहा है। ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ओमिद बेहजाद और पूरिया सफवत पर आरोप था कि उन्होंने पिछली गर्मियों में हुई छोटी लड़ाई और हालिया संघर्ष के दौरान इस्त्राइल को सैन्य और सुरक्षा ठिकानों की लोकेशन (कोऑर्डिनेट्स) के साथ-साथ तस्वीरें और जानकारी भेजी थीं। जनवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के बाद 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर फिर से हमले किए। इस्राइल की सैन्य रणनीति की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने मार्च में बताया था कि मौजूदा ईरान संघर्ष के दौरान इस्त्राइल ने मुखबिरों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स के चेकपॉइंट्स को निशाना बनाया था।
चार माह में 50 लोगों को फंदे से लटकाया
‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ की 24 जुलाई को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने पिछले चार महीनों में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अस्पष्ट आरोपों में कम से कम 50 लोगों को फांसी दी है। इनमें कई 18 और 19 साल के युवा भी शामिल हैं। जेनेवा में ईरान के स्थायी मिशन ने इस संबंध में टिप्पणी के लिए अनुरोध का अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। हालांकि, तेहरान ने पहले भी कैदियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों से इन्कार करता रहा है।

