दिल्ली के जंतर-मंतर पर जिस बात को लेकर छात्रों को जुटाया गया, कुछ वही आज पटना में हुआ। दिल्ली में जिस तरह का हंगामा हुआ, कुछ वही आज पटना में हुआ। इस तरह, दिल्ली में हुए आंदोलन की गूंज पटना वालों ने करीब से सुनी। दिल्ली में भीड़ को बुलाने वाले नेतृत्व पर जिस तरह गायब रहने का आरोप लगा, पटना का आंदोलन ठीक वैसा नहीं था। लेकिन, जंतर-मंतर की तरह ही अनियंत्रित हालत जरूर थी। पटना में इस प्रदर्शन की तैयारी किसी राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि वामपंथी छात्र संगठन ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (AISA) ने की थी। 36 साल पुराने संगठन- AISA के कार्यकर्ता बुधवार सुबह सैकड़ों छात्रों के साथ गांधी मैदान से राजभवन मार्च के लिए निकले। और फिर शुरू हंगामे का दौर। ऐसा दौर कि पटना में केंद्रीय बलों को सड़क पर तैनात करना पड़ा।

छह घंटे पूरा पटना परेशान रहा
इस आंदोलन के कारण करीब छह घंटे पूरा पटना परेशान रहा। सड़कें जाम रहीं। बुधवार दोपहर मार्च को सबसे पहले जेपी गोलंबर के पास पुलिस ने रोक दिया गया था। इसके बाद छात्रों और पुलिस के बीच करीब दो घंटे तक नोकझोंक और धक्का-मुक्की होती रही। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारी कुछ देर के लिए पीछे हटे, लेकिन वे आंदोलन समाप्त करने को तैयार नहीं हुए। वे दूसरे रास्ते से पुलिस को चकमा देते हुए डाकबंगला चौराहा पहुंच गए और वहीं प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही पटना पुलिस ने मौके पर भारी संख्या में बल तैनात कर दिया। बैरिकेडिंग कर छात्रों को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने पर अड़े रहे। इसके बाद यहां भी पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
सीएम आवास तक पहुंचने की जिद
इसी दौरान कुछ छात्र मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सरकारी आवास ‘लोक भवन’ की ओर बढ़ने लगे। हालांकि, लोक भवन से कुछ ही दूरी पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। हालात को नियंत्रित करने के लिए एक बार फिर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इधर, बिहार विधानसभा के भीतर विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पेश करने की प्रक्रिया चल रही थी तथा सभी विधायक सदन के अंदर मौजूद थे। कुछ छात्र विधानसभा की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया। एहतियातन विधानसभा के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए और परिसर के भीतर तथा बाहर भारी संख्या में पुलिस व सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए। पटना में केंद्रीय बलों को सड़क पर उतारना पड़ा।
दिल्ली वाले मुद्दों के साथ बिहार की बात भी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शनों की तर्ज पर है, लेकिन बिहार में आयोजित होने के कारण इसमें राज्य से जुड़े शिक्षा संबंधी मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारी जहां ‘नीट’ (NEET) पेपर लीक मामले, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग कर रहे थे, वहीं बिहार की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों को लेकर भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया गया।
AISA की ओर से जारी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और सभी पेपर लीक मामलों की फास्ट-ट्रैक जांच।
- बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का इस्तीफा तथा छात्रों पर लाठीचार्ज बंद करने की मांग।
- 7.5 सीजीपीए (CGPA) की अनिवार्यता समाप्त कर सभी छात्रों को समान डिग्री देने की मांग।
- यूजी, पीजी और पीएचडी स्तर पर बढ़ाई गई फीस वापस लेने की मांग।
- बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी शोधार्थियों के लिए ‘नॉन-नेट फेलोशिप’ लागू करने की मांग।
- शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग।
- पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाने की मांग।
- बिहार की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किए जाने का विरोध।
- महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त कर उन्हें सरकारी नियंत्रण में लाने के प्रयासों का विरोध।
- ‘पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1974’ में प्रस्तावित बदलावों के जरिए विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक स्वायत्तता समाप्त करने के प्रयास का विरोध।
