पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच घरेलू शेयर बाजारों की शुरुआत फ्लैट रही है। आज सुबह सेंसेक्स और निफ्टी में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिला। वैश्विक संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के कारण विशेषज्ञ बाजार के सीमित दायरे में रहने की उम्मीद जता रहे हैं। कॉरपोरेट नतीजों के सीजन के बीच चुनिंदा शेयरों में तेज एक्शन देखने को मिल सकता है।

बाजार की शुरुआत कैसी रही और प्रमुख सूचकांकों का क्या हाल है?
भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बिना किसी बड़ी हलचल के सपाट स्तर पर हुई। प्रमुख सूचकांकों के आंकड़े इस प्रकार हैं:
- सेंसेक्स: सेंसेक्स 48.69 अंक (0.06 प्रतिशत) की मामूली गिरावट के साथ 77,659.83 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
- निफ्टी: दूसरी ओर, निफ्टी 13.75 अंक (0.06 प्रतिशत) की हल्की बढ़त के साथ 24,252.25 के स्तर पर बना हुआ है। निफ्टी 24,250 के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब टिका हुआ है।
बाजार में गिरावट के बीच किन शेयरों में सबसे बड़ी सुस्ती देखी जा रही है?
शुरुआती कारोबार में बाजार के बड़े शेयरों पर दबाव देखने को मिल रहा है। प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में:
- एचडीएफसी बैंक: बैंकिंग क्षेत्र के इस दिग्गज शेयर में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।
- पेटीएम: वित्तीय तकनीक कंपनी पेटीएम के शेयरों में भी शुरुआती ट्रेडिंग में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
बाजार की सुस्त चाल के पीछे कौन से बड़े वैश्विक और घरेलू कारण हैं?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार एक मिश्रित झुकाव के साथ सीमित दायरे में ही घूमता नजर आएगा। इसके पीछे ये मुख्य कारण जिम्मेदार हैं:
भू-राजनीतिक तनाव: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
कच्चा तेल: ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें प्रति बैरल 88 डॉलर के पार बनी हुई हैं, जिससे चिंता बढ़ी है।
कमजोर रुपया: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में कमजोरी लगातार बनी हुई है और यह प्रति डॉलर 96 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है।
एफआईआई की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार से लगातार अपनी पूंजी निकाल रहे हैं।
कमजोर वैश्विक संकेत: दुनिया भर के बाजारों से मिल रहे संकेत काफी मिले-जुले और सुस्त हैं।
एशिया से लेकर अमेरिका और यूरोप के बाजारों का क्या रुख है?
ग्लोबल मार्केट की बात करें तो अलग-अलग देशों से मिले-जुले रुझान देखने को मिल रहे हैं:
- अमेरिकी बाजार: यूएस में एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में टोक्यो समय के अनुसार सुबह 11:58 बजे तक 0.2 प्रतिशत की बढ़त देखी गई।
- जापानी बाजार: जापान का टॉपिक्स सूचकांक 1.8 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है।
- ऑस्ट्रेलिया और चीन: ऑस्ट्रेलिया के S&P/ASX 200 में 0.1 प्रतिशत और हांगकांग के हैंगसेंग (Hang Seng) में 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, चीन का शंघाई कंपोजिट 0.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है।
- यूरोपीय बाजार: यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में 0.4 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई है।
बाजार के लिए आगे का क्या दृष्टिकोण है?
चूंकि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) के कॉरपोरेट नतीजों का सीजन धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है, इसलिए बाजार में अब इंडेक्स से ज्यादा स्टॉक-स्पेसिफिक एक्शन यानी चुनिंदा शेयरों में बड़ी हलचल देखने को मिलेगी। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक ग्लोबल फ्रंट पर स्थितियां सामान्य नहीं होतीं और रुपये की कमजोरी दूर नहीं होती, तब तक व्यापक बाजार में एक सीमित रेंज के भीतर ही उतार-चढ़ाव होने की संभावना सबसे अधिक है।

