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क्या अमेरिका के सैनिकों में हो गई मर्दाना कमी? चर्चा में ट्रंप प्रशासन का अनोखा फैसला

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मिडिल ईस्ट में बने तनाव के हालात के बीच अब अमेरिका अपनी सैन्य ताकत को मजबूत करने में लग गया है. यहां अमेरिका आर्मी को घातक बनाने में जुट गया है. अमेरिका ने नया फरमान सैन्य क्षमता को विकसित करने के लिए जारी किया है. अमेरिका अब अपने सैनिकों की सालाना मर्दाना टेस्टिंग करवाएगा. अमेरिका के वॉर मिनिस्टर पीट हेगसेथ ने घोषणा करते हुए कहा है कि इस टेस्टिंग का मकसद टेस्टोस्टेरोन होर्मोन की जांच करना है. 

अलजजीरा के मुताबिक, अमेरिका के वॉर मिनिस्टर हेगसेथ ने एक वीडियो भी जारी किया है. इसमें उन्होंने इस नई प्रक्रिया को लेकर जानकारी दी है. उन्होंने कहा है कि इस पॉलिसी का मकसद सैनिक को मुश्किल और मजबूत हालात का सामना करने के लिए सक्षम में बनाना है. इससे सैनिक हर काम को कर सकें. साथ ही मॉर्डन युद्ध प्रणाली के सामने मानसिक रूप से मजबूत रहें. 

अमेरिका के वॉर मिनिस्टर ने इस प्रोग्राम को लेकर क्या कहा है? 
हेगसेथ की मानें तो युद्ध के मैदान में अपनी आक्रमकता दर्शाने के लिए सैनिकों में सही स्तर का टेस्टोस्टेरोन होना जरूरी है. इससे पता लगाया जा सके कि जिन सैनिकों में इसकी मात्रा का स्तर कम है, वहां उन्हें टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थैरेपी दी जाएगी. यह एक वैकल्पिक व्यवस्था होगी. ताकि युद्ध के मैदान में अपने उच्च स्तर पर सैनिक आक्रमकता जाहिर कर सकें. अमेरिका अब अपने सैनिकों की फिटनेस के अलावा टफनेस, किलर इंस्टिक्ंट, बहादुरी जैसी मुख्य बिंदुओं पर नजर रखेगी. यह टेस्ट 30 साल से अधिक उम्र के सैनिकों का साल में एक बार किया जाएगा. 

हेगसेथ ने कहा है कि यह बायोलॉजिकल एबिलिटी को बहाल करने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए है. साथ ही लंबी उम्र को लेकर भी है. यानी की आपके पास युद्ध के दौरान टिके रहने और हालातों से लड़ने की क्षमता हो. उन्होंने माना कि अमेरिका अपने योद्धाओं के लिए दुनिया की सबसे अच्छी मेडिकल केयर के लिए जिम्मेदार है. यह प्रोग्राम उसे पूरा करता है. 

इस उम्र के लोगों के शरीर में हो जाती है कमी? 
दरअसल, 30 से 79 साल के उम्र के लगभग 5.6 प्रतिशत पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की कमी होने का अनुमान रहता है. इससे मांसपेशियों को नुकसान, थकान, वजन बढ़ना और यौन समस्याएं विकसित हो सकती हैं. इसके अलावा यह डायविटीज, दिल की बीमारी, डिप्रेशन जैसी बीमारियों का कारण भी बनता है. 

क्या होते हैं टेस्टोस्टेरोन हार्मोन?
दरअसल, टेस्टोस्टेरोन एक सेक्स हार्मोन है. यह पुरुषों में Testes में बनता है. वहीं, महिलाओं में Ovaries और Adrenal Glands में बनता है. महिलाओं में यह कम मात्रा में बनता है. इसके Testes का मतलब अंडकोष होता है, और Ovaries और Adrenal Glands का मतलब अंडाशय और एड्रिनल ग्रंथियां होता है. इन्हीं को मर्दानगी का हार्मोन यानी टेस्टोस्टेरोन कहा जाता है. 

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इसी की वजह से पुरुषों की दाढ़ी मूंछ, भारी आवाज, मांसपेशियों का विकास और हड्डियों को मजबूती देता है. इसके अलावा मांसपेशियों में ताकत, एनर्जी, सहनशक्ति, यौन इच्छा और मानसिक आत्मविश्वास को बनाए रखने में इसका अहम योगदान होता है. माना जा रहा है कि हथियारों की ताकत बढ़ाने के अलावा अमेरिका व्यक्तिगत रूप से अपने सैनिकों को मजबूती देने पर ध्यान दे रहा है. 

पेंटागन का यह अहम फैसला माना जा रहा
हाल ही में ट्रंप प्रशासन इन कोशिशों में जुटा हुआ था. ऐसे में पेंटागन का यह फैसला अहम माना जा रहा है. इसका मकसद टेस्टोस्टेरोन थैरेपी को आसानी से उपलब्ध कराना है. पिछले ही महीने अमेरिका के हेल्थ और ह्यूमन सर्विस डिपार्टमेंट ने टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट ट्रीटमेंट पर लगे बैन को कम करने की योजना का ऐलान किया था. इसके तहत FDA ने  हाइपोगोनैडिज्म से पीड़ित पुरुषों के लिए इस थेरेपी की मंजूरी दी है. हाइपोगोनैडिज्म ऐसी समस्या है, जिसमें टेस्टोस्टेरोन कम हो जाता है. हेगसेथ भी मानते हैं , कि सेना का काम सोशल एक्सपेरिमेंट करना नहीं है. बल्कि योद्धा तैयार करना है. 

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