नेपाल अब भी भारत में सबसे ज्यादा छात्र भेजने वाला देश है। जबकि विदेशी छात्रों को आकर्षित करने वाले राज्यों में कर्नाटक सबसे आगे है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सर्वेक्षण में यह जानकारी निकलकर सामने आई है।

उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (एआईएसएचई) 2023-24 में बताया गया कि शैक्षणिक वर्ष 2023-24 में भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों में 173 देशों के छात्र पढ़ाई के लिए आए। देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में कुल 58,134 विदेशी छात्रों के दाखिले हुए।
एआईएसएचई देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों से ऑनलाइन माध्यम से विस्तृत जानकारी जुटाता है। इसके लिए संस्थान छात्रों के दाखिले, शिक्षक और कर्मचारियों की जानकारी, सुविधाओं, परीक्षा परिणाम और अन्य जानकारियां एआईएसएचई पोर्टल पर अपलोड करते हैं।
यह सर्वे भारत में उच्च शिक्षा से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों का मुख्य स्रोत है। इससे शिक्षा नीति बनाने, योजना तैयार करने और शिक्षा क्षेत्र की निगरानी में मदद मिलती है।
कौन से देशों से सबसे ज्यादा छात्र आए?
साल 2023-24 में भारत आने वाले विदेशी छात्रों में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी नेपाल की रही। नेपाल से आने वाले छात्रों की संख्या कुल विदेशी छात्रों का 24.1 फीसदी रही।
इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से 7 फीसदी, अमेरिका से 5.9 फीसदी, बांग्लादेश से 5.9 फीसदी, नाइजीरिया से 5.5 फीसदी और जिम्बाब्वे से 4 फीसदी छात्र आए।
रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष 10 देशों से आने वाले छात्रों की संख्या 2023-24 में भारत के कुल विदेशी छात्रों का 63.8 फीसदी रही।
विदेशी छात्रों की पहली पसंद कौन सा राज्य रहा?
- अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने में कर्नाटक सबसे आगे रहा।
- कर्नाटक के उच्च शिक्षा संस्थानों में 7,914 विदेशी छात्र पढ़ रहे हैं।
- पंजाब दूसरे स्थान पर रहा, जहां 7,902 विदेशी छात्रों ने दाखिले लिए।
- महाराष्ट्र में 6,190, उत्तर प्रदेश में 5,953 और तमिलनाडु में 5,694 विदेशी छात्र पढ़ रहे हैं।
- ये राज्य विदेशी छात्रों को दाखिला देने वाले शीर्ष पांच राज्यों में शामिल हैं।
किस पाठ्यक्रम में सबसे ज्यादा विदेशी छात्रों ने लिया दाखिला?
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा विदेशी छात्रों ने स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया। कुल विदेशी छात्रों में 73.6 फीसदी छात्र स्नातक स्तर की पढ़ाई कर रहे थे। इसके बाद 16.8 फीसदी छात्रों का स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिला हुआ।
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कुल 42,779 छात्र स्नातक पाठ्यक्रमों में पढ़ रहे थे, जो कुल विदेशी छात्रों का करीब 74 फीसदी है। इनमें 27,849 पुरुष और 14,930 महिलाएं थीं। इसके अलावा 9,845 छात्र स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में पढ़ रहे थे। वहीं डिप्लोमा, पीएचडी, प्रमाणपत्र और अन्य संयुक्त पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या इससे कम रही।
भारत में विदेशी छात्रों की संख्या कितनी बढ़ी?
- भारत में विदेशी छात्रों की संख्या 2019-20 में 48,898 थी, जो बढ़कर 2023-24 में 58,134 हो गई।
- पांच साल में विदेशी छात्रों की संख्या में 9,236 की बढ़ोतरी हुई, यानी इसमें 18.9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
- इस बढ़ोतरी में पुरुष और महिला दोनों छात्रों की संख्या बढ़ी।
- पुरुष छात्रों की संख्या 32,386 से बढ़कर 37,295 हो गई, जबकि महिला छात्रों की संख्या 16,512 से बढ़कर 20,839 हो गई।
2023-24 में लेबनान, बुर्किना फासो, मंगोलिया, मैक्सिको, कजाखस्तान, बेलारूस और चिली समेत कई अन्य देशों के छात्र भी पढ़ाई के लिए भारत में आए। शिक्षा मंत्रालय ने साल 2018 में स्टडी इन इंडिया (एसआईआई) कार्यक्रम शुरू किया था। इसका उद्देश्य विदेशी छात्रों को भारत में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए आकर्षित करना है।
