अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध विराम खत्म होने की घोषणा की है. इसके बाद दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. इसी बीच भारत के लिए एक और चिंता की खबर सामने आई है.
अमेरिका के 4 सीनियर सीनेटर्स ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए एक नए लॉ को आगे बढ़ाने की घोषणा की है. उनका कहना है कि रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए उन देशों को निशाना बनाया जाना चाहिए जो अब भी रूस से तेल और नेचुरल गैस खरीद रहे हैं. उनका मानना है कि रूस को मिलने वाली यह कमाई यूक्रेन युद्ध को जारी रखने में मदद कर रही है.
डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल और जीन शाहीन के साथ रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर लिंडसे ग्राहम और रोजर विकर ने शुक्रवार (10 जुलाई 2027) को कहा कि वे ट्रंप प्रशासन के साथ एक समझौते पर पहुंच गए हैं. उन्होंने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाले कानून को आगे बढ़ाने के लिए ट्रंप प्रशासन के साथ सहमति बन गई है. उन्होंने कहा कि इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और वे जल्द ही इस कानून को लागू होते देखना चाहते हैं.
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500 फीसदी तक बढ़ सकता है अमेरिकी टैरिफ

सीनेटरों ने कहा कि रूस लगातार नागरिक इलाकों पर हमले कर रहा है. ऐसे में अमेरिका की सरकार और संसद को मिलकर ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिनसे रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़े. उनका कहना है कि ऐसे देश रूस की मदद कर रहे हैं. यह प्रस्तावित कानून रूस से तेल, नेचुरल गैस, यूरेनियम और अन्य पेट्रोलियम प्रोडक्ट खरीदने वाले देशों को निशाना बनाता है. वर्ष 2025 के सैंक्शनिंग रूस एक्ट को आगे बढ़ाने वाले इन सीनेटरों का मानना है कि रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना जरूरी है. इस कानून के शुरुआती ड्राफ्ट में रूस से एनर्जी खरीदने वाले देशों के सामान और सेवाओं पर 500 फीसदी तक अमेरिकी टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया था. सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पहले इस प्रस्तावित टैरिफ को हड्डियां तोड़ देने वाला कदम बताया था.
किसी देश को छूट दे सकता है अमेरिका
इस कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी दिया गया है कि अगर किसी देश को छूट देना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में हो तो उसे 180 दिनों तक इस कार्रवाई से राहत दी जा सकती है. अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, इस बिल में बाद में कुछ बदलाव किए गए हैं और टैरिफ से जुड़े प्रावधानों को पहले की तुलना में थोड़ा नरम किया गया है. हालांकि नए और अंतिम ड्राफ्ट की पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है. इस पूरे मामले में भारत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. कानून का समर्थन करने वाले नेताओं ने कई बार भारत का नाम लिया है. जून 2025 में सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि अगर चीन और भारत रूस को समर्थन देना जारी रखते हैं तो इसके लिए वे खुद जिम्मेदार होंगे.
प्रस्तावित कानून को अमेरिकी सीनेट में अच्छा-खासा समर्थन
इस बीच अमेरिका की तरफ से जारी एक स्पेशल लाइसेंस 17 जून को समाप्त हो गया था. इस प्रस्तावित कानून को अमेरिकी सीनेट में अच्छा-खासा समर्थन मिला है. कुल 84 सीनेटर इस बिल के सह-प्रायोजक बन चुके हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा था कि वह इस कानून को रूस पर दबाव बनाने के एक साधन के रूप में देख रहे हैं, ताकि यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत आगे बढ़ सके. हालांकि सीनेटर ग्राहम पहले यह दावा कर चुके हैं कि ट्रंप इस कानून का समर्थन करते हैं, लेकिन रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला यह प्रस्ताव पहली बार पेश किए जाने के एक साल से अधिक समय बाद भी अभी तक कानून नहीं बन पाया है.
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