पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के समय भारत की ओर से दिए गए इस आश्वासन के तहत कि गैंगस्टर अबू सलेम को 25 साल से ज्यादा जेल में नहीं रखा जाएगा, अब एक नया कानूनी सवाल खड़ा हो गया है। मुंबई की विशेष अदालत के सामने इस हफ्ते यह मुद्दा पहुंचा है कि अगर अबू सलेम 16.51 लाख रुपये का जुर्माना नहीं भरता है तो क्या उसे नियमों के मुताबिक 18 साल 6 महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी या फिर 25 साल की सीमा के कारण यह अतिरिक्त सजा लागू नहीं होगी।
अबू सलेम की सजा में फंसा नया कानूनी पेंच
फिलहाल अबू सलेम नासिक सेंट्रल जेल में बंद है और 1993 मुंबई बम ब्लास्ट मामले तथा बिल्डर प्रदीप जैन हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों मामलों में टाडा अदालत ने उस पर कुल 16.51 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। साथ ही आदेश दिया था कि अगर वह जुर्माना नहीं भरता है तो एक मामले में 8 साल और दूसरे में 10 साल 6 महीने यानी कुल 18 साल 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
क्या कहता है पुर्तगाल का कानून
अब सवाल यह है कि क्या यह अतिरिक्त सजा भी उस पर लागू होगी, जबकि भारत ने पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के समय यह भरोसा दिया था कि उसे किसी भी हालत में 25 साल से ज्यादा जेल में नहीं रखा जाएगा। इसी कानूनी उलझन को लेकर नासिक जेल प्रशासन और खुद अबू सलेम ने विशेष अदालत में अलग-अलग अर्जी दाखिल की है।
जेल प्रशासन ने अदालत से कहा है कि 25 साल की अधिकतम सजा वाली शर्त के कारण यह साफ नहीं है कि अगर सलेम जुर्माना नहीं भरता है तो उसे अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी या नहीं। अदालत से इस बारे में स्पष्ट आदेश मांगा गया है, ताकि उसकी कुल सजा की अवधि का सही हिसाब लगाया जा सके।
वहीं, अबू सलेम ने अपनी अर्जी में कहा है कि जेल प्रशासन ने उसे जुर्माना जमा करने को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। उसने यह भी कहा कि 11 जुलाई 2022 को सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश में न तो जुर्माने का कोई जिक्र है और न ही उसे जमा कराने का कोई निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ इतना कहा था कि उसकी सजा की अवधि 25 साल मानी जाएगी। इसलिए अदालत जेल प्रशासन को इस मामले में साफ निर्देश दे।
2005 को पुर्तगाल से भारत लाया गया था अबू सलेम
अबू सलेम को 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत लाया गया था। प्रत्यर्पण के समय भारत सरकार ने पुर्तगाल को भरोसा दिया था कि जिन मामलों में उसे भारत लाया जा रहा है, उनमें दोषी ठहराए जाने पर उसे न फांसी की सजा दी जाएगी और न ही 25 साल से ज्यादा जेल में रखा जाएगा।
इसके बाद 2018 में अबू सलेम इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि उसकी 25 साल की सजा की गिनती 2005 से होगी और यह अवधि 2030 में पूरी होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसकी रिहाई पर 2030 में विचार किया जाएगा। हालांकि उस फैसले में यह नहीं बताया गया था कि जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में मिलने वाली अतिरिक्त सजा का क्या होगा। यही वजह है कि अब यह सवाल फिर अदालत के सामने आ गया है।
जेल प्रशासन ने अदालत को यह भी बताया कि अबू सलेम सूचना के अधिकार कानून के तहत लगातार आवेदन देकर यह जानकारी मांग रहा है कि क्या जुर्माना नहीं भरने पर मिलने वाली अतिरिक्त सजा खत्म मानी जाएगी या नहीं। इसी कारण अदालत से स्पष्ट आदेश मांगा गया है कि उससे जुर्माना वसूला जाए या फिर जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त सजा लागू होगी।
अबू सलेम पहले भी रिमिशन के नियमों का हवाला देकर समय से पहले रिहाई की मांग करता रहा है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट 2022 में साफ कर चुका है कि उसकी रिहाई के सवाल पर 2030 में ही विचार किया जाएगा। अब विशेष अदालत के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 16.51 लाख रुपये का जुर्माना नहीं भरने पर अबू सलेम को 18 साल 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी या 25 साल की सीमा के कारण ऐसा नहीं किया जा सकेगा। अदालत के फैसले से इस कानूनी स्थिति पर पहली बार स्पष्टता आने की उम्मीद है।

