लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

NATO Summit 2026: तुर्किए के अंकारा में जुटे 32 देशों के नेता, NATO समिट में क्या होगा सबसे बड़ा फैसला? दुनिया की टिकीं नजरें

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

तुर्किए की राजधानी अंकारा में मंगलवार (7 जुलाई) और बुधवार (8 जुलाई 2026) को NATO देशों के नेताओं की अहम बैठक हो रही है. यह समिट ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार NATO सदस्य देशों पर रक्षा खर्च बढ़ाने का दबाव बना रहे हैं. माना जा रहा है कि कई यूरोपीय देश इस बैठक के दौरान रक्षा क्षेत्र में अरबों डॉलर के नए समझौतों की घोषणा कर सकते हैं.

इस समिट में NATO के सभी 32 सदस्य देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं. इसके अलावा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग भी मौजूद हैं. ऑस्ट्रेलिया, जापान और न्यूजीलैंड ने अपने रक्षा या विदेश मंत्रियों को भेजा है. वहीं बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हो रहे हैं. हालांकि सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के समिट में शामिल होने की उम्मीद नहीं है, लेकिन वे अंकारा में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से अलग बैठक कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें: चीन के ‘दुश्मन’ को भारत देगा ‘अस्त्र’, PM मोदी ने इंडोनेशिया के साथ किए 20 करार

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का नाटो को लेकर सवाल

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से नाटो देशों के रक्षा खर्च को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. उनका कहना है कि अमेरिका पर सुरक्षा का बहुत अधिक आर्थिक बोझ पड़ रहा है और अन्य देशों को भी अपनी जिम्मेदारी बढ़ानी चाहिए. ट्रंप के दबाव के बाद पिछले कुछ वर्षों में कई नाटो देशों ने अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी की है. पिछले साल नाटो देशों ने अपने रक्षा खर्च को बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 5 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य तय किया था. इस साल की बैठक में इस बात पर चर्चा होगी कि बढ़ाए गए बजट को वास्तविक सैन्य क्षमता में कैसे बदला जाए. हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि केवल पैसा खर्च करने से तुरंत सैन्य ताकत नहीं बढ़ती और इसके परिणाम दिखने में कई साल लग सकते हैं.

नाटो मिटिंग में यूक्रेन महत्वपूर्ण मुद्दा

इस समिट में यूक्रेन भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है. यूक्रेन नाटो का सदस्य नहीं है, लेकिन रूस के साथ जारी युद्ध के कारण उसे नाटो देशों का समर्थन मिलता रहा है. राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की इस दौरान ट्रंप से अलग मुलाकात करेंगे. माना जा रहा है कि वे यूक्रेन के लिए अतिरिक्त पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य सैन्य सहायता की मांग करेंगे. हाल ही में रूस के हमलों में यूक्रेन के कई शहरों को नुकसान हुआ है. कीव पर हुए एक ड्रोन हमले में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई थी. ऐसे में यूक्रेन चाहता है कि नाटो देश उसे राजनीतिक और सैन्य दोनों तरह का समर्थन जारी रखें ताकि उसकी रक्षा क्षमता कमजोर न पड़े. यूरोपीय देश भी इस समिट को काफी अहम मान रहे हैं. कई देशों की तरफ से रक्षा क्षेत्र में बड़े निवेश और नए सैन्य अनुबंधों की घोषणा किए जाने की संभावना है. कुछ विशेषज्ञ इसे ट्रंप प्रशासन को संतुष्ट करने की कोशिश के रूप में भी देख रहे हैं.

तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की भूमिका

तुर्किए, जो इस बार समिट की मेजबानी कर रहा है, हाल के वर्षों में अपने रक्षा खर्च में लगातार बढ़ोतरी कर चुका है और अब नाटो के बड़े सैन्य निर्यातकों में शामिल हो गया है. तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की भूमिका भी इस बैठक में महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इस बीच अमेरिका ने कुछ नाटो देशों से अपने लड़ाकू विमान, युद्धपोत और पनडुब्बियों की तैनाती धीरे-धीरे कम करने की योजना का संकेत दिया है. इससे यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस समिट का सबसे बड़ा उद्देश्य नाटो देशों के बीच एकता दिखाना है. भले ही सदस्य देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद मौजूद हों, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध और बदलते वैश्विक हालात के बीच नाटो यह संदेश देना चाहता है कि उसका गठबंधन अभी भी मजबूत और एकजुट है.

ये भी पढ़ें: दुनिया का पहला AI हैकर? बिना इंसान के JADEPUFFER ने किया साइबर अटैक, डेटा एन्क्रिप्ट कर मांगी बिटकॉइन में फिरौती

]
Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment