पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के कथित दुष्कर्म और हत्या मामले में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। निषेधाज्ञा के बावजूद TMC नेताओं का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिला और हरसंभव मदद का भरोसा दिया। दूसरी ओर सरकार ने SIT गठित कर मुख्य आरोपी समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया है। हिंसा, मॉब लिंचिंग और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच मामले की जांच जारी है।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन नेता रहे शामिल?
प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और स्थानीय विधायक बिमान बनर्जी, राज्यसभा सांसद डोला सेन और जयनगर की सांसद प्रतिमा मंडल समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। नेताओं ने पीड़िता के पिता और मां से अलग-अलग मुलाकात की तथा पार्टी की ओर से कानूनी और हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। मुलाकात के बाद डोला सेन ने पत्रकारों से कहा, ‘हम यहां ममता बनर्जी के प्रतिनिधि के रूप में आए थे। हमने पीड़िता के पिता से उनके बारुईपुर स्थित घर पर और मां व अन्य परिजनों से उनके पैतृक गांव में मुलाकात की। हमने उन्हें भरोसा दिलाया है कि ममता बनर्जी परिवार के साथ मजबूती से खड़ी हैं और उन्हें हर संभव मदद दी जाएगी।’
बारुईपुर जाने से पहले ममता के घर हुई बैठक
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बारुईपुर रवाना होने से पहले प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिण कोलकाता स्थित ममता बनर्जी के कालीघाट आवास पर बैठक की। इसके बाद सभी नेता पीड़ित परिवार से मिलने के लिए निकले।
ममता बनर्जी ने निकाला कैंडिल मार्च
घटना के विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में कैंडिल मार्च निकालकर पीड़िता को श्रद्धांजलि दी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग दोहराई। मार्च में बड़ी संख्या में TMC नेता, कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौकान ममता बनर्जी ने कहा कि इस जघन्य अपराध के आरोपियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सरकार हरसंभव कदम उठाए।
रविवार को TMC ने क्या लगाए थे आरोप?
रविवार रात TMC ने आरोप लगाया था कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पीड़िता के परिवार से मिलने से रोकने के लिए उनके आवास के बाहर बैरिकेडिंग की गई और भारी पुलिस बल तैनात किया गया। TMC विधायक बिमान बनर्जी ने कहा कि पुलिस को अपराधियों की गिरफ्तारी में सक्रियता दिखानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के पास विरोध-प्रदर्शन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था और यह प्रदर्शन पूरी तरह स्वतःस्फूर्त था। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को पीड़ित परिवार से मिलने से रोकना दुर्भाग्यपूर्ण है और यह लोगों की आवाज दबाने की कोशिश है। बिमान बनर्जी ने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार तक पहुंचने में कई बाधाएं डाली गईं। पुलिस ने कई स्थानों पर उनके काफिले को रोका और वाहनों की तलाशी ली ताकि यह पता लगाया जा सके कि ममता बनर्जी उनके साथ हैं या नहीं।
पुलिस को क्यों करना पड़ रहा गु्स्से का सामना?
सोमवार को भी बारुईपुर में तनाव का माहौल बना रहा। एक दिन पहले स्थानीय लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान पथराव हुआ, मुख्य सड़क जाम कर दी गई, टायर जलाए गए और पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की गई।
संदिग्ध व्यक्ति को भीड़ ने उतारा था मौत के घाट
रविवार को तालाब से बोरी में बंद बच्ची का शव मिलने के बाद गुस्साई भीड़ ने दुष्कर्म और हत्या के आरोप में एक संदिग्ध व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। हिंसा के बाद पुलिस ने बारुईपुर, नरेंद्रपुर और सोनारपुर थाना क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी। पूरे इलाके में भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
जांच के लिए SIT का गठन
राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए स्थानीय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की अध्यक्षता में छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। पुलिस ने बताया कि रातभर चले तलाशी अभियान के दौरान दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, जबकि तीन अन्य को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। मामले का मुख्य आरोपी आनंद सरदार भी सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया।
मुख्यमंत्री ने किस चीज का दिया भरोसा?
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता में कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि पीड़ित परिवार को न्याय मिले और इस जघन्य अपराध के दोषियों को फांसी की सजा दिलाई जाए। उन्होंने आगे कहा कि यह बेहद भयावह अपराध है। मैंने पीड़िता के माता-पिता से बात की है। सरकार उनकी हर मांग पूरी कर रही है। उन्हें न्याय मिलेगा और दोषियों को मृत्युदंड दिलाने की पूरी कोशिश की जाएगी। मुझे खुशी है कि परिवार ने सरकार पर भरोसा जताया है।
हिंसा के मामलों में भी दर्ज हुए केस
मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्य अपराध के अलावा हिंसा से जुड़े तीन अलग-अलग मामले भी दर्ज किए गए हैं। भीड़ द्वारा की गई हत्या (मॉब लिंचिंग) में सांप्रदायिक पहलू भी सामने आया है। रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे 2019 के CAA विरोधी आंदोलन और हाल के वक्फ अधिनियम विरोधी प्रदर्शनों जैसी घटनाओं की याद ताजा हो गई। इसके अलावा CRPF के दो जवानों पर हमला किया गया और पुलिस की एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या आया सामने?
पीड़िता के परिवार का आरोप है कि बच्ची की हत्या की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न, सिर में गंभीर चोट और डूबने की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, सिर में लगी चोट और डूबने के संयुक्त प्रभाव से बच्ची की मौत हुई।


