दिल्ली सरकार ने अपनी नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) नीति के जरिए एक ऐसी बड़ी खामी को हमेशा के लिए बंद कर दिया है, जिसका फायदा उठाकर लोग दिल्ली में मिलने वाली भारी सब्सिडी का लाभ उठाते थे और फिर अपनी गाड़ियों को दूसरे राज्यों में ट्रांसफर कर लेते थे। 1 जुलाई को नोटिफाई की गई ‘दिल्ली ईवी पॉलिसी 2026’ में इस चालाकी को रोकने के लिए एक बेहद सख्त नियम जोड़ा गया है, जो इसके शुरुआती ड्राफ्ट में नहीं था।
सरकार का साफ मकसद है कि अगर दिल्ली के टैक्सपेयर्स के पैसे से ईवी पर सब्सिडी दी जा रही है। तो वे गाड़ियां दिल्ली की सड़कों पर ही चलें ताकि यहाँ की हवा साफ हो सके और प्रदूषण से राहत मिले। इसके साथ ही, अगले दो वर्षों में कई श्रेणियों में नई पेट्रोल, डीजल और सीएनजी (CNG) गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन को पूरी तरह बंद करने का मेगा प्लान भी बरकरार रखा गया है।
सब्सिडी का फायदा उठाकर दूसरे राज्य भागने वालों को कैसे रोका जाएगा?
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3 साल तक नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) पर रोक: नई नीति के तहत, जो भी इलेक्ट्रिक वाहन दिल्ली सरकार की खरीद प्रोत्साहन योजना के तहत सब्सिडी का लाभ उठाएगा, उसे अगले तीन साल तक दिल्ली से बाहर ट्रांसफर या री-रस्ट्रेशन करने के लिए एनओसी (NOC) नहीं दी जाएगी।
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पॉलिसी का बदलता रूप: साल 2020 में जब पहली ईवी पॉलिसी आई थी, तब पूरा ध्यान सिर्फ खरीद इंसेंटिव देने, रोड टैक्स माफ करने और चार्जिंग स्टेशन बनाने पर था। लेकिन 2026 की इस नई नीति ने नियमों को कड़ा कर दिया है। अब इंसेंटिव के साथ सख्त शर्तें, सीमित पात्रता और रजिस्ट्रेशन की अनिवार्य आवश्यकताओं को जोड़कर बदलाव को प्रभावित किया जा रहा है।