प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सचिवों की मंगलवार को बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इसमें जीवन-यापन और कारोबार करने में आसानी के लिए शुरू किए गए सुधारों की समीक्षा भी होगी।

सूत्रों ने बताया कि कुछ सचिव अपने-अपने मंत्रालयों की प्रस्तुति देंगे। इसमें मंत्रालयों के कामकाज और अल-अलग सुधारों व लोगों के हित में उठाए गए कदमों की जानकारी होगी। प्रधानमंत्री ने पहले ही सरकार का लक्ष्य निर्धारित कर दिया है, जो देश की स्वतंत्रता के 100वें वर्ष यानी 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है।
ये भी पढ़ें: प्रवासी मजदूर बनकर रह रहे थे बांग्लादेशी?: केरल के कोझिकोड में तीन गिरफ्तार, पुलिस ने शुरू की जांच
आर्थिक तरक्की और भावी रोडमैप की चुनौतियां
इस उच्च स्तरीय बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के 7.7 प्रतिशत की जीडीपी विकास दर और चौथी तिमाही के 7.8 प्रतिशत के आंकड़ों पर भी गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है। मजबूत घरेलू मांग और सरकारी खर्च के दम पर जनवरी-मार्च तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। एक साल पहले विकास दर 7 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 7.8 प्रतिशत हो गई है। इसी तरह, पूरे साल की विकास दर भी वित्त वर्ष 2025 में 7.1 प्रतिशत से बढ़कर अब 7.7 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
बैठक में क्या होगा खास?
- विकसित भारत का लक्ष्य: साल 2047 तक देश को विकसित बनाने के लिए खाका तैयार करना।
- रिफॉर्म एक्सप्रेस की रफ्तार: पिछले 10 साल में हुए व्यवस्थागत बदलावों को और आगे बढ़ाना।
- जीडीपी में रिकॉर्ड उछाल: वित्त वर्ष 2025-26 में दर्ज हुई 7.7% की मजबूत आर्थिक विकास दर की समीक्षा।
- जीरो पेंडेंसी पर जोर: जनता से जुड़े सरकारी कामों और फाइलों को बिना देरी निपटाने का सख्त निर्देश।
- युवाओं के लिए अवसर: देश में रोजगार और युवाओं के लिए नए रास्ते खोलने पर विशेष फोकस।
प्रशासनिक दिग्गजों की मौजूदगी
प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि मंत्रियों और अधिकारियों का एकमात्र उद्देश्य जनता के जीवन को आरामदायक बनाना होना चाहिए। मंगलवार को होने वाली इस महाबैठक में प्रधानमंत्री के दो प्रधान सचिव पी के मिश्रा और शक्तिकांत दास के साथ-साथ कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन भी मौजूद रहेंगे। क्या सरकारी काम करने के तौर-तरीकों में अब बड़ा बदलाव आने वाला है? पीएम मोदी की सचिवों के साथ यह बैठक देश को 2047 तक विकसित बनाने और 7.7% की जीडीपी ग्रोथ को नई ऊंचाई पर ले जाने का एक बड़ा प्रशासनिक प्रयास है, जिसका सीधा असर आम जनता की जिंदगी और देश के कारोबार पर पड़ेगा।
