अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कंपनियों पर लगाए जाने वाले डिजिटल कर (टैक्स) के खिलाफ अपना रुख और सख्त कर दिया है। शुक्रवार को उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी देश अमेरिकी कंपनियों पर डिजिटल सेवा कर (डीएसटी) लगाएगा, उसके अमेरिका भेजे जाने वाले सभी सामान पर 100% आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह शुल्क पहले से हुए किसी भी व्यापार समझौते से ऊपर होगा।


ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि कई यूरोपीय देश अमेरिकी कंपनियों पर डीएसटी लागू करने पर चर्चा कर रहे हैं और कुछ देश इसे लागू करने के बहुत करीब पहुंच चुके हैं।
ये भी पढ़ें: 40 से ज्यादा जहाजों पर हमले, 14 नाविकों की मौत; IMO ने समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा पर उठाई आवाज
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि अगर कोई देश ऐसा टैक्स लागू करता है, तो अमेरिका तुरंत जवाबी कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने लिखा कि जो भी देश यह टैक्स लगाएगा, उसके अमेरिका भेजे जाने वाले सभी सामान पर तुरंत 100% टैरिफ लगाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह टैरिफ उस देश के साथ हुए सभी व्यापार समझौतों पर भारी होगा, चाहे वे लागू हो चुके हों, उन पर हस्ताक्षर हो चुके हों या नहीं। अगर कोई देश आगे बढ़ता है, तो यह 100% टैरिफ तुरंत लागू कर दिया जाएगा।
पहले भी विरोध कर चुके ट्रंप
ट्रंप पहले भी कई बार अमेरिकी टेक कंपनियों पर दूसरे देशों की ओर से लगाए जाने वाले टैक्स और नियमों का विरोध कर चुके हैं। पिछले साल अगस्त में भी उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर कोई देश अमेरिकी टेक कंपनियों पर ऐसे टैक्स या नियम लागू करेगा, तो अमेरिका उस पर नए टैरिफ लगाएगा। उनका कहना था कि ऐसे टैक्स और नियम खास तौर पर अमेरिकी टेक कंपनियों को नुकसान पहुंचाने या उनके साथ भेदभाव करने के लिए बनाए जाते हैं।
ईयू के साथ व्यापार समझौते से पहले चेतावनी
ट्रंप की यह ताजा चेतावनी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच चार जुलाई तक एक व्यापार समझौते को अंतिम मंजूरी देने की समय सीमा तय है। इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ से अमेरिका आने वाले अधिकांश सामान पर 15% टैरिफ तय किया जाना है।
यूरोपीय संघ ने कई महीनों की बातचीत के बाद मई में अमेरिका के साथ व्यापार समझौता पूरा कर लिया था। यह समझौता यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और डोनाल्ड ट्रंप की स्कॉटलैंड में हुई बैठक के बाद हुआ था। हालांकि, डीएसटी का मुद्दा इस समझौते में शामिल नहीं किया गया था। यह अब भी अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच सबसे बड़े विवादित मुद्दों में से एक बना हुआ है।
