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Nirjala Ekadashi 2026 Live:सबसे कठिन और और पुण्यदायी निर्जला एकादशी आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नियम – Nirjala Ekadashi Vrat 2026 Live Puja Vidhi Vrat Parana Time Snan Daan Upay And Katha In Hindi

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07:16 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु को क्या अर्पित करें?

Nirjala Ekadashi Upay: निर्जला एकादशी पर करें तुलसी से जुड़े खास उपाय, हर मनोकामना होगी पूरी

07:01 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पूजा विधि 

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करके उसे तैयार करें।
  • हाथ में जल और पुष्प लेकर निर्जला एकादशी व्रत तथा भगवान विष्णु की पूजा का संकल्प लें।
  • एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उसे फूलों से सजाएं और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करें।
  • श्रीहरि को पीले पुष्प, चंदन, अक्षत, हल्दी, तुलसी दल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी और वस्त्र अर्पित करें।
  • श्रद्धापूर्वक विष्णु सहस्रनाम और विष्णु चालीसा का पाठ करें।
  • निर्जला एकादशी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
  • कपूर या घी के दीपक से भगवान विष्णु की आरती करें।
  • पूजा पूर्ण होने पर जल से भरा मिट्टी का कलश दान करें।
  • पूरे दिन निराहार रहकर व्रत का पालन करें और भजन-कीर्तन तथा भगवान के स्मरण में समय बिताएं।
  • सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में दीप प्रज्वलित कर पुनः विष्णु पूजा करें।
  • रात्रि में यथाशक्ति जागरण कर भगवान का भजन करें।
  • अगले दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा करें।

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर बन रहा है महासंयोग! रवि-शिव-सिद्ध सहित 4 योग

06:48 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi Live: निर्जला एकादशी पूजा मुहूर्त

प्रथम पूजा मुहूर्त: प्रातः 05:25  से 07:10 बजे तक

द्वितीय पूजा मुहूर्त: प्रातः10:39 से दोपहर 02:09 बजे तक.

06:42 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर बन रहे हैं ये 4 शुभ संयोग

रवि योग: 25 जून को प्रातः 5:25 बजे से शुरू होकर सायं 4:29 बजे तक यह योग प्रभावी रहेगा।

शिव योग: यह योग 24 जून की प्रातः 10:24 बजे से शुरू होकर 25 जून की प्रातः 10:54 बजे तक रहेगा। 

सिद्ध योग: 25 जून की प्रातः 10:55 बजे से लेकर 26 जून की प्रातः 11:39 बजे तक यह योग बना रहेगा। 

गुरुवार का विशेष योग: इस बार निर्जला एकादशी का व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु तथा देवगुरु बृहस्पति दोनों को समर्पित माना जाता है। 

 

06:12 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी से क्यों मिलता है साल भर की एकादशियों का फल?

पद्म पुराण में इस व्रत से जुड़ी एक रोचक कथा मिलती है। कहा जाता है कि एक बार पांडव पुत्र भीमसेन ने महर्षि वेद व्यास के सामने अपनी एक चिंता रखी। भीम ने बताया कि उनके पेट में वृक नाम की एक अग्नि हमेशा जलती रहती है, जिसकी वजह से उन्हें हर समय तेज भूख का अनुभव होता है। इसी कारण वे जीवन में कभी कोई व्रत नहीं रख पाए। उन्होंने व्यासजी से प्रार्थना की कि उन्हें कोई ऐसा सरल उपाय बताया जाए, जिसे एक बार करने से ही उनका कल्याण हो सके और उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हो सके। इस पर वेद व्यास ने भीम को ज्येष्ठ मास की एकादशी तिथि पर जल त्याग कर व्रत रखने की सलाह दी। चूंकि ज्येष्ठ का महीना सबसे अधिक गर्मी वाला होता है, इस दौरान बिना पानी के रहना बेहद मुश्किल काम है, और इसी कठिनाई के चलते इस व्रत को सबसे कठिन एकादशियों में गिना जाता है। व्यासजी ने यह भी कहा कि सिर्फ इस एक एकादशी का व्रत करने से ही साल भर में आने वाली समस्त एकादशियों के व्रत का फल अपने आप प्राप्त हो जाता है। इसी पौराणिक मान्यता के कारण भीम के नाम पर इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।

06:08 AM, 25-Jun-2026

निर्जला एकादशी तिथि 

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जून, बुधवार, शाम 6:13 बजे

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त: 25 जून, गुरुवार, शाम 8:10 बजे

उदय तिथि के अनुसार निर्जला एकादशी व्रत आय यानी 25 जून, गुरुवार को है। 

05:43 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026 Live: सबसे कठिन और और पुण्यदायी निर्जला एकादशी आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नियम

आज यानी 25 जून को सबसे कठिन और पुण्दायी एकादशी है। ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी कहा जाता है। धार्मिक शास्त्रों में इस एकादशी को बेहद पवित्र और सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है। ऐसी मान्यता है कि सिर्फ इस एक एकादशी का व्रत रखने से ही पूरे साल में आने वाली सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य की प्राप्ति हो जाती है। इस व्रत की सबसे खास बात यह है कि इस दौरान जल ग्रहण करना भी वर्जित माना गया है। पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि जो व्यक्ति इस दिन जल का त्याग करते हुए पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु की आराधना करता है, उसे मेरु पर्वत जितने बड़े पापों से भी छुटकारा मिल जाता है और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता यह भी है कि इस दिन किए गए स्नान, दान और जप जैसे कार्यों का फल कभी नष्ट नहीं होता, बल्कि अक्षय बना रहता है। आइए अब विस्तार से जानते हैं इस पावन पर्व का महत्व, पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त और इससे जुड़ी जरूरी सामग्री के बारे में।

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