पाकिस्तान की एक आतंकवाद-रोधी अदालत द्वारा बलोच मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलोच को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा हो गया है. बलोच अधिकारों की मुखर आवाज मानी जाने वाली महरंग के समर्थन में अब दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन, कार्यकर्ता और राजनीतिक संगठन खुलकर सामने आ रहे हैं. मामला इतना बड़ा हो गया है कि इसकी गूंज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.
महरंग बलोच कौन हैं?
महरंग बलोच बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगियों, हिरासत में मौतों और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ लंबे समय से आवाज उठाती रही हैं. वह बलोच यकजहती कमेटी (BYC) की प्रमुख नेताओं में गिनी जाती हैं और लापता लोगों के परिवारों के लिए अभियान चलाने के कारण बलूच समाज में काफी लोकप्रिय हैं.
गिरफ्तारी और सजा का मामला क्या है?
महरंग को मार्च 2025 में क्वेटा में आयोजित एक धरने के दौरान गिरफ्तार किया गया था. यह प्रदर्शन कथित तौर पर जबरन गायब किए गए लोगों और न्यायेतर हत्याओं के खिलाफ आयोजित किया गया था. बाद में पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधी अदालत ने उन्हें और अन्य तीन कार्यकर्ताओं को फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा सुना दी.
ग्रेटा थनबर्ग ने क्यों उठाई आवाज?
स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने एक वीडियो संदेश जारी कर महरंग की रिहाई की मांग की है. ग्रेटा का कहना है कि शांतिपूर्ण असहमति को अपराध की तरह पेश किया जा रहा है और महरंग को उनके राजनीतिक और मानवाधिकार कार्यों की वजह से निशाना बनाया गया है. ग्रेटा ने आरोप लगाया कि महरंग को लंबे समय तक हिरासत में रखा गया, जहां उन्हें अलगाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा. उन्होंने यह भी दावा किया कि मुकदमा हाई-सिक्योरिटी जेल के भीतर बंद दरवाजों के पीछे चलाया गया, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं.
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मानवाधिकार संगठनों ने क्या कहा?
इंटरनेशनल ह्यूमन राइट फाउंडेशन ने भी फैसले की कड़ी आलोचना की है. संगठन का आरोप है कि मुकदमा निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं था तथा आरोपियों को पर्याप्त कानूनी अधिकार नहीं दिए गए. IHRF ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्वतंत्र जांच कराने तथा पाकिस्तान पर निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाने की मांग की है.
ट्रंप तक कैसे पहुंचा मामला?
बलोच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर महरंग बलोच को सुनाई गई उम्रकैद पर चिंता जताई है. पत्र में कहा गया है कि महरंग ने अपना जीवन बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों और जबरन गुमशुदगियों के मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने के लिए समर्पित किया है. संगठन का आरोप है कि उनके खिलाफ फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, न्यायिक प्रक्रिया और शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है.
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पाकिस्तान पर बढ़ रहा अंतरराष्ट्रीय दबाव
महरंग बलोच की सजा को लेकर पाकिस्तान की न्यायिक प्रक्रिया और मानवाधिकार रिकॉर्ड पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है. जहां पाकिस्तान का दावा है कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया है, वहीं मानवाधिकार संगठन और बलोच समूह इसे राजनीतिक आवाजों को दबाने की कार्रवाई बता रहे हैं. इसी वजह से महरंग बलोच का मामला अब केवल पाकिस्तान का आंतरिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार बहस का हिस्सा बन चुका है.


