ज्योति के साथ कोई है?
रात 9:15 बजे जालीदार लोहे के गेट के भीतर से पुलिसकर्मी की आवाज आई ज्योति के साथ कोई है? यह सुनते ही भीड़ में खड़ी मूर्ति देवी ने सिर हिलाते हुए कहा, हां, मैं हूं। इतना कहते ही वह फूट-फूटकर रोने लगी। पास में मौजूद ज्योति के पिता कमता निवासी हरिचरन भी खुद को रोक नहीं पाए।
…और भर आईं आंखें
हादसे में जान गंवाने वाले निलेश के परिजनों की चीख सुनकर मौजूद लोगों की आंखें भर आई। इस बीच महिलाएं एक-दूसरे को संभालने की कोशिश कर रही थीं। साथ आए बुजुर्ग की हालत भी बिगड़ गई। वह रोते-रोते जमीन पर बैठ गए, जिसके बाद आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें पानी पिलाकर संभालने का प्रयास किया। एक युवती निलेश-निलेश चिल्लाते हुए आई। इसी तरह बाकी लोग अपनों की खबर लेते नजर आए।
कानपुर के गोविंद नगर की सोनिया विज पर तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पहले उनके पति पुष्पराज की मौत हो गई और अब बेटे संयम विज ने भी छोड़ दिया। सोनिया ने रोते हुए कहा कि वह बेटे को दूर जाने नहीं देना चाहती थीं, पर वह नहीं माना। काश, मैंने अपने लाल को रोक लिया होता। सयंम तीन वर्ष से स्टूडियो में थ्रीडी एनीमेशन आर्टिस्ट की नौकरी करते थे।
इससे अच्छा तो भगवान मुझे उठा लेता इससे अच्छा तो भगवान मुझे उठा लेता
यह कहते हुए जानकीपुरम के केशव पंत फफक पड़े। उनका बेटा सागर भी स्टूडियो में काम करता था। घटना में जान गवांने वाले मो. अम्मार के पिता मंसूर आलम का भी ऐसा ही हाल था। अम्मार बाराबंकी के लखपेड़ा बाग के रहने वाले थे। वह स्टूडियो में तीन साल से नौकरी कर रहे थे।





