आग पर काबू पाने के बाद दमकल और एसडीआरएफ के जवानों ने एक-एक कर शवों को बाहर निकाला। कुछ शव बुरी तरह जल गए थे, जिन्हें बोरे में भरकर एंबुलेंस से पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया। देर रात तक टॉर्च की रोशनी में मलबे के बीच शवों की तलाश होती रही। सुरक्षा के लिहाज से रात तक बड़ी संख्या में पुलिस बल घटना स्थल पर मौजूद रहा।
मौके पर नहीं आया भवन स्वामी
बिल्डिंग में आग की खबर पाकर सैकड़ों की संख्या में लोग जमा हो गए। पुलिस ने लोगों को किनारे हटाकर बचाव कार्य शुरू किया। इतनी भयावह घटना की जानकारी मिलने के बाद भी भवन स्वामी वीरेंद्र वहां नहीं पहुंचे। घटना स्थल पर बड़ी संख्या में महिलाएं भी आ गई थीं, जिनकी आंखों में आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। महिला पुलिसकर्मियों ने किसी तरह महिलाओं को संभाला और वहां से हटाया।
नीचे सीढ़ियों पर आग, ऊपर की ओर बंद था दरवाजा
अलीगंज के जिस व्यावसायिक स्थल पर आग लगी थी, वहां पर लोग चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे थे कि छत पर जाने का दरवाजा खुल गया होता तो शायद तमाम लोगों की जिंदगी बच जाती। आग ने नीचे जाने वाले सीढ़ियों को अपनी गिरफ्त में ले लिया था। इसलिए परिसर में फंसे लोग जान बचाने के लिए ऊपर की तरफ भागे थे।
घटना स्थल पर लोगों ने बताया कि आग से घिरे लोग ऊपर की ओर भागे। उन्होंने छत का दरवाजा खोलने की बहुत कोशिश की, मगर वह नहीं खुला। अगर दरवाजा खुल गया होता तो छत से पास के मकान की छत पर कूद कर जान बचा सकते थे। मगर, व्यावसायिक स्थल के ऊपर का दरवाजा खुल नहीं सका, जिससे सीढ़ियों पर फंसे लोगों की झुलसने और दम घुटने से मौत हो गई।






