ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने स्विट्जरलैंड से लौटने के बाद एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब युद्ध से पहले वाली स्थिति में कभी नहीं लौटेगा। गालिबाफ ने साफ किया कि अब ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते का प्रबंधन अपने इंतजामों के हिसाब से करेगा, हालांकि इस दौरान अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन किया जाएगा।
गालिबाफ ने अमेरिका के साथ हुई तकनीकी बातचीत के बाद बताया कि ईरान ने इन चर्चाओं में अपनी ताकत दिखाई है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के दबाव की वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सोशल मीडिया पर अपनी एक पोस्ट भी बदलनी पड़ी। इस पोस्ट में ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि वह लेबनान में हिजबुल्लाह जैसे अपने सहयोगी समूहों की मदद करना बंद करे। गालिबाफ ने इसे ईरान के कूटनीतिक प्रभाव का बड़ा सबूत बताया।
क्षेत्रीय स्थिति पर बात करते हुए गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका पर भरोसा करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा, हमने कभी अमेरिकियों पर भरोसा नहीं किया, न अब करते हैं और भविष्य में भी उन पर अविश्वास करना ही सही होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर ईरान स्विट्जरलैंड की बातचीत में शामिल नहीं होता, तो लेबनान में मुसलमानों और शियाओं का और ज्यादा खून बहता। उनके अनुसार, इन वार्ताओं ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ने से रोकने में मदद की है।
ईरानी संसद अध्यक्ष ने देश की एकता पर जोर देते हुए कहा कि सभी को सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि खामेनेई का फैसला और निर्देश ही अंतिम होगा।
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गालिबाफ ने बातचीत के फायदों का जिक्र करते हुए बताया कि इसके परिणामस्वरूप ईरान के रोके गए पैसे वापस मिलेंगे और तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी। यह बातचीत अमेरिका और ईरान के बीच दुश्मनी खत्म करने के लिए हुए 14 सूत्रीय समझौते (MoU) का हिस्सा थी। फिलहाल, दोनों पक्ष एक उच्च-स्तरीय समिति बनाने और 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के रोडमैप पर सहमत हुए हैं।


