यूपी के बांदा जिले में थाने के अंदर 19 वर्षीय शिवानी की हत्या का मामला अब केवल हत्या या प्रेम प्रसंग तक सीमित नहीं रह गया है। प्रकरण को लेकर पुलिस महकमे की किरकिरी तो हुई ही साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
दो वर्षों तक चले प्रेम संबंध, परिवारों के विरोध, घर छोड़कर की गई शादी और आखिरकार थाने के भीतर हुई हत्या ने पूरे घटनाक्रम को कई गंभीर सवालों के केंद्र में ला खड़ा किया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस युवती को सुरक्षा और न्याय दिलाने के लिए थाने लाया गया था, उसकी जान पुलिस की मौजूदगी में कैसे चली गई। पुलिस को देखकर पीड़ित की हिम्मत बंधनी तो दूर की बात यहां जान ही चली गई। घटना के वक्त ऐसा नहीं था कि सूनसान स्थान पर घटनाक्रम को अंजाम दिया गया हो बल्कि खाकी की मौजूदगी में यह दुस्साहस किया गया।