कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आज विपक्षी दलों के गठबंधन- INDIA ब्लॉक से जुड़ी बैठक को लेकर बयान दिया। दिल्ली में हुई इस बैठक में कांग्रेस के अलावा तृणमूल कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी राजनीतिक दल भी शामिल हुए थे। इस बैठक का उल्लेख करते हुए राहुल ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट लिखा। उन्होंने इसके साथ यू्ट्यूब का वीडियो लिंक भी साझा किया।


20 से भी ज्यादा नेताओं के भाषणों के बाद क्या बोले राहुल?
राहुल ने लिखा, कई साथियों ने INDIA गठबंधन की बैठक में मेरे भाषण का हिंदी अनुवाद मांगा था- यह रहा, जरूर सुनें। 8 जून को INDIA गठबंधन की बैठक में 20 से भी ज्यादा नेताओं के भाषणों और बातों को सुनने के बाद आखिर में मैंने… संबोधित किया।’
जब जनता की आवाज दबाई जाए तो ऐसे में विकल्प क्या?
देश में अहम मुद्दों और प्रतिकूल हालात में मजबूती के साथ प्रतिरोध की अहमियत को रेखांकित करते हुए राहुल ने लिखा, ‘जब भारत की सोच, देश की आत्मा पर संकट हो… जब संस्थाओं पर कब्ज़ा हो… जब जनता की आवाज दबाई जाए… तब सिर्फ एकता के साथ प्रतिरोध काम आता है।’
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राहुल ने किस आधार पर कहा- 2029 का चुनाव हम जीत चुके हैं!
उन्होंने चुनाव नतीजों का जिक्र करते हुए कहा, ‘मैं फिर से कह रहा हूं- 2024 का चुनाव हम हारे नहीं थे और 2029 का चुनाव हम जीत चुके हैं। हम एकजुट रहेंगे, जन-जन को संगठित करेंगे और प्रतिरोध की ताकत से BJP और उसके भारत के संस्थानों पर कब्ज़े को हराएंगे।’
राहुल गांधी के बयान के सियासी मायने?
राहुल गांधी का यह कहना कि 2024 का चुनाव हम हारे नहीं और 2029 का चुनाव हम जीत चुके हैं, दरअसल राजनीति में एक सोची-समझी मनोवैज्ञानिक रणनीति है। लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों ने विपक्ष को एक मजबूत और आक्रामक भूमिका में ला खड़ा किया है। ‘2029 की जीत’ का दावा करके राहुल गांधी अपनी पार्टी और पूरे इंडिया गठबंधन के कार्यकर्ताओं में यह भरोसा भरना चाहते हैं कि सत्ता अब उनसे दूर नहीं है। इसके जरिए वे सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखना चाहते हैं और जनता को यह संदेश दे रहे हैं कि विपक्ष अब सिर्फ विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि आने वाले समय में देश चलाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
सीटों का फासला और गठबंधन की ताकत
अगर इसके पीछे के गणित को देखें, तो 2024 के नतीजों ने भाजपा और विपक्ष के बीच के अंतर को बहुत कम कर दिया है। भाजपा अपने दम पर बहुमत (272 सीटें) के आंकड़े से पीछे रह गई थी और उसे सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। दूसरी तरफ, इंडी गठबंधन ने करीब 230 से ज्यादा सीटें जीतकर अपनी ताकत साबित की है। चुनावी विश्लेषकों के मुताबिक, इस प्रदर्शन से विपक्ष का वोट शेयर काफी बढ़ा है। राहुल गांधी इसी गणित को आधार बना रहे हैं कि अगर विपक्ष अगले पांच साल तक एकजुट रहता है, जमीनी स्तर पर जनता के मुद्दों को उठाता है तो 2029 में सत्ता परिवर्तन का आंकड़ा आसानी से छुआ जा सकता है।
