पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ओमान के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। अमेरिकी सेना का दावा था कि जहाज ने उसके निर्देशों का पालन नहीं किया और वह ईरान से जुड़े प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। वहीं जहाज के संचालक iOS Marine ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जहाज का ईरान या ईरानी तेल से कोई संबंध नहीं था। घटना के बाद भारत सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
क्या इस तरह के मामले पहले भी हुए हैं? अगर हुए हैं तो इनके कुछ चर्चित उदाहण कौन से हैं? इन मामलों में सरकार की ओर से किस तरह का रुख अपनाया गया? आइये जानते हैं..
सबसे पहले जानें, ताजा मामले में सरकार ने क्या किया?
- विदेश मंत्रालय ने भारत में अमेरिकी प्रभारी राजदूत जेसन मीक्स को तलब किया और औपचारिक विरोध-पत्र सौंपा।
- विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपने समुद्री समुदाय की सुरक्षा और कल्याण को अत्यंत महत्व देता है तथा इस प्रकार की घटनाएं तुरंत बंद होनी चाहिए।
- पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय ने बचाए गए नाविकों की वापसी की व्यवस्था की और मृतकों के परिवारों को सीमैन वेलफेयर फंड सोसायटी से 10-10 लाख रुपये की सहायता देने का निर्णय लिया।
- सरकार ने यह भी बताया कि खाड़ी क्षेत्र में 18 हजार से अधिक भारतीय नाविक कार्यरत हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
