संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने UNSC की बैठक में पाकिस्तान को खूब खरी-खोटी सुनाईं. अफगानिस्तान को लेकर हुई बैठक में उन्होंने कहा कि अपनी नाकामियों के लिए पड़ोसियों को दोष देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है. दुनिया को गुमराह करने की यह कोशिश नाकाम रहेगी.
भारतीय दूत ने कहा, ‘भारत यूनाइटेड नेशंस असिस्टेंस मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) और उसके काम के महत्व पर जोर देना चाहता है और इन मुश्किल हालात में पूरा समर्थन देना चाहता है, क्योंकि वह अफ़गानिस्तान में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान ने आज अपने बयान में UNAMA के इरादों और UNSG की रिपोर्ट की सच्चाई पर सवाल उठाए. हम इस बात पर ज़ोर देना चाहते हैं कि मल्टीलेटरलिज़्म (बहुपक्षवाद) और संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करना कोई ‘अपनी पसंद का मेन्यू’ चुनने जैसा नहीं है. अफगानिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान के मिलिट्री एयरस्ट्राइक अभियान से आम नागरिकों को भारी जान-माल का नुकसान हो रहा है और अफगान लोगों को तकलीफ उठानी पड़ रही है. हम एयरस्ट्राइक, सीमा पार से गोलीबारी और टारगेटेड हत्याओं से आम नागरिकों की मौत पर सेक्रेटरी जनरल की गहरी चिंता को दोहराते हैं, जैसा कि UNAMA की रिपोर्ट में बताया गया है.’
भारत ने अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक पर PAK को सुनाया
भारत ने रमजान के महीने में पाकिस्तान की अफगानिस्तान में की गई एयरस्ट्राइक की कड़ी निंदा की. पी हरीश ने कहा, ‘भारत अफगान क्षेत्र में एयरस्ट्राइक की कड़ी निंदा करता है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून, UN चार्टर और राज्य की संप्रभुता के सिद्धांत का खुला उल्लंघन है. UNAMA के अनुसार, इस साल के शुरुआती तीन महीनों में ही 372 आम नागरिक मारे गए और 397 घायल हुए; इनमें से ज़्यादातर लोग रमज़ान के पवित्र महीने में मारे गए – यह शांति, दया और आत्म-चिंतन का समय होता है, जो इस हरकत को और भी ज़्यादा निंदनीय बनाता है. हम UNAMA की उस अपील को दोहराते हैं जिसमें आम नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत अपनी ज़िम्मेदारियों – जैसे कि सावधानी, अंतर करने और आनुपातिकता के सिद्धांतों – का पालन करने को कहा गया है.’
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उन्होंने आगे कहा कि कोई भी धर्म, कानून या नैतिकता ऐसी हरकतों को सही नहीं ठहरा सकती! मैं फिर से कहता हूं – किसी नरसंहार को सैन्य कार्रवाई का नाम देने से उसे अंजाम देने वाला बरी नहीं हो जाता. आम नागरिकों को मारना, अपंग बनाना या अनाथ करना आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई नहीं है. अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामी एकजुटता के ऊंचे सिद्धांतों की बात करना और साथ ही रमजान के पवित्र महीने में बेरहमी से हवाई हमले करना पाखंड का सबसे बड़ा उदाहरण है. अपनी नाकामियों के लिए पड़ोसियों को दोष देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है। दुनिया को गुमराह करने की यह कोशिश नाकाम रहेगी.
भारत ने फितना-अल-हिंदुस्तान पर भी सुनाया
इसके अलावा पी हरीश ने कहा, ‘इस्लामाबाद द्वारा अपनी सीमाओं के भीतर सक्रिय समूहों को ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ कहना कुछ और नहीं, बल्कि धार्मिक शब्दावली में लिपटा आधिकारिक रूप से प्रायोजित गलत सूचना फैलाने का अभियान और दुष्प्रचार है.’ पाकिस्तानी मीडिया द्वारा प्रसारित खबरों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने बलूचिस्तान प्रांत में सक्रिय सभी आतंकवादी समूहों और संगठनों को पिछले वर्ष आधिकारिक रूप से फितना अल-हिंदुस्तान करार दिया था और बिना कोई सबूत दिए आरोप लगाया था कि ये संगठन भारत के इशारे पर आतंकवाद में शामिल हैं. पर्वतनेनी ने इसे ‘पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान से संचालित नफरत की ऐसी संगठित फैक्टरी का परिणाम बताया, जिसका उद्देश्य अपने नागरिकों को भारत के खिलाफ स्थायी शत्रुता की स्थिति में रखना है, ताकि सत्ता पर उनकी पकड़ बनी रहे और राष्ट्रीय संसाधनों पर नियंत्रण बनाए रखा जा सके.’


