- सोमवार को शेयर बाजार भारी गिरा, निवेशकों के ₹5 लाख करोड़ स्वाहा.
- ईरान-इजरायल तनाव बढ़ा, कच्चे तेल के दाम बढ़े, डॉलर मजबूत.
- विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कमजोर रुपये से बाजार में गिरावट आई.
Share Market Crash: शेयर बाजार निवेशकों के लिए आज का दिन ‘ब्लैक मंडे’ हुआ. कारोबार शुरु होने के कुछ ही घंटों के भीतर उनके करोड़ों का निवेश पानी में डूब गए. सोमवार को शुरुआती कारोबार में ही निफ्टी 50 और सेंसेक्स दोनों औंधे मुंह गिर गए.
कमजोर ग्लोबल संकेतों, विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों के सेंटिमेंट पर बुरा असर डाला, जिससे शेयर बाजार की चाल भी डगमगा गई. आज बाजार में चौतरफा बिकवाली के चलते सेंसेक्स लगभग 800 अंक तक टूट गया और निफ्टी भी 23100 के करीब फिसल गया. इस बड़ी गिरावट की वजह से महज कुछ ही घंटों में निवेशकों के 5 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए. इससे BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर लगभग 456 लाख करोड़ रुपये रह गया.
बाजार के सामने बढ़ी चुनौतियां
आज बाजार में हर तरफ बिकवाली देखी गई. सेंसेक्स में शामिल हर स्टॉक गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था. बेंचमार्क इंडेक्स के अलावा भी बाजार में कमजोरी साफ देखी गई. निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों में 1% से ज्यादा की गिरावट आई, जो निवेशकों के बीच जोखिम से बचने के मूड को दिखाता है.
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार बताते हैं, “हफ्ते की शुरुआत में बाजार के सामने बड़ी चुनौतियां हैं. पिछले शुक्रवार नैस्डैक में 4.18% की भारी गिरावट ने ग्लोबल मार्केट को हिलाकर रख दिया था, जिससे टेक-हेवी दक्षिण कोरिया और ताइवान में जबरदस्त बिकवाली हो रही है. पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और लेबनान में इजरायल की कार्रवाई के जवाब में ईरान द्वारा इजरायल पर मिसाइल दागने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 96 डॉलर के पार चली गई है. अमेरिका से मई के महीने के लिए आए जॉब्स के आंकड़े भी अच्छे हैं इसलिए फेडरल रिजर्व (Fed) दरों में कटौती न करने की भी उम्मीदें तेज हैं.
शेयर बाजार में गिरावट की वजहें
ईरान-इजरायल के बीच बढ़ा तनाव- रविवार रात ईरान द्वारा इजरायल पर नए सिरे से किए गए मिसाइल हमलों और इस पर इजरायल की जवाबी कार्रवाई के बाद भू-राजनीतिक तनाव गहरा गया है. इससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है.
क्रूड ऑयल में उछाल- ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 3.29% उछलकर 96.15 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं. भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल आयात करता है. ऐसे में आयात महंगा होगा, तो महंगाई बढ़ने का भी खतरा रहेगा. इससे कॉर्पोरेट कंपनियों के मुनाफे पर काले बादल छा सकते हैं.
अमेरिकी टेक बाजार में गिरावट- बीते शुक्रवार को अमेरिकी बाजार का टेक इंडेक्स Nasdaq 4.18% और S&P 500 2.64% तक क्रैश हो गया. अमेरिकी शेयर बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर शेयरों में आई बड़ी गिरावट का असर भारत के आईटी सेक्टर के शेयरों पर भी दिखा. इससे निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.85% तक क्रैश हो गया.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली- विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. मजबूत डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण विदेशी फंड गोल्ड जैसे सेफ हेवेन एसेट्स का रुख कर रहे हैं. इससे बाजार में बिकवाली का दबाव बना हुआ है.
कमजोर होता रुपया- वैश्विक तनाव और डॉलर की मजबूती के बीच भारतीय रुपया आज डॉलर के मुकाबले 38 पैसे टूटकर 95.32 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया. कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए रिटर्न कम करता है, जिससे बाजार में वे और ज्यादा बिकवाली करते हैं.
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