विपक्षी खेमे में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सोमवार को राजधानी के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया ब्लॉक’ की बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई। चुनाव नतीजों के बाद सभी घटक दलों का यह पहला औपचारिक जमावड़ा था। इस बैठक में आगे की रणनीति पर गंभीर मंथन हुआ। बैठक में 23 राजनीतिक दलों के कुल 27 शीर्ष नेता शामिल हुए। हालांकि, कुछ बड़े दलों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
बैठक में पहुंचे कई दिग्गज
इस अहम बैठक में विपक्षी गठबंधन के लगभग सभी प्रमुख चेहरे मौजूद रहे। कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल ने कमान संभाली। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी बैठक में शामिल हुए। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी विशेष रूप से दिल्ली पहुंचे। इनके अलावा राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। झारखंड मुक्ति मोर्चा से सरफराज अहमद बैठक में पहुंचे।

वर्चुअल जुड़ाव और निर्दलीय का साथ
शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वर्चुअली हिस्सा लिया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की तरफ से सुप्रिया सुले ने प्रतिनिधित्व किया। वहीं, पूर्व कांग्रेस नेता और वर्तमान निर्दलीय राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल भी इस बैठक में मौजूद रहे। यह विपक्षी एकता के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
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वामपंथ और क्षेत्रीय दलों की हुंकार
बैठक में वामपंथी और छोटे क्षेत्रीय दलों ने भी पूरी ताकत दिखाई। सीपीआई (एम) के जॉन ब्रिटास, सीपीआई के डी राजा और सीपीआई (एमएल) के दीपांकर भट्टाचार्य शामिल हुए। इसके साथ ही आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन, आईयूएमएल के सादिक थांगल, वीसीके के थिरुमावलवन और एमडीएमके के वाइको ने हिस्सा लिया। केरल कांग्रेस से के जॉर्ज और केरल कांग्रेस (एम) से जोस के मनी भी पहुंचे। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के हनुमान बेनीवाल, लोक दल के सुनील सिंह, फॉरवर्ड ब्लॉक के जी देवराजन और शेतकारी कामगार पक्ष के जयंत पाटिल भी मौजूद रहे। भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इन दो बड़े दलों ने बनाई दूरी
सफलता के दावों के बीच इस बैठक में कुछ खाली कुर्सियां भी सुर्खियां बटोर रही थीं। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और आम आदमी पार्टी (आप) ने इस अहम बैठक से पूरी तरह दूरी बना ली। तमिलनाडु से किसी भी दल की मौजूदगी न होना और ‘आप’ का गायब रहना विपक्षी एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है।


