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Rbi के फैसले की घड़ी:पश्चिम एशिया के तनाव और महंगाई के बीच क्या 5.25% पर ही अटका रहेगा रेपो रेट? फैसला कल – Rbi Monetary Policy: Will Governor Sanjay Malhotra Keep Repo Rate Unchanged At 5.25% Amid Global Conflicts?

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क्या आपके होम लोन की ईएमआई बढ़ने वाली है या आपको फिलहाल राहत मिलेगी? भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद अहम फैसलों का एलान करने जा रहे हैं। बुधवार से चल रही तीन दिवसीय चर्चा के बाद यह फैसला ऐसे समय में आ रहा है जब पश्चिम एशिया का तनाव आर्थिक विकास और महंगाई के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रहा है। 

क्या 5.25% पर स्थिर रह सकती हैं दरें?

विशेषज्ञों और बाजार के जानकारों का मानना है कि आरबीआई इस बार भी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रख सकता है। अर्थशास्त्रियों और ट्रेजरी प्रमुखों के बीच किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, 15 उत्तरदाताओं में से 11 का मानना है कि एमपीसी दरों में कोई बदलाव नहीं करेगी, जबकि चार विशेषज्ञों को रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की आशंका है। केंद्रीय बैंक को यह सुनिश्चित करने का लक्ष्य मिला हुआ है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई दर चार प्रतिशत (दो प्रतिशत ऊपर-नीचे के मार्जिन के साथ) के दायरे में रहे, जिसे ध्यान में रखते हुए यह सतर्क रुख अपनाया जा रहा है।

अर्थव्यवस्था और रियल एस्टेट सेक्टर पर क्या होगा असर?

अर्थव्यवस्था के प्रमुख दिग्गजों का मानना है कि दरों में स्थिरता मौजूदा समय की मांग है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने बुधवार को एक कार्यक्रम में साफ किया कि यदि आरबीआई मौजूदा महंगाई की चुनौतियों के बीच नीतिगत दरों में यथास्थिति बनाए रखता है, तो इससे आर्थिक विकास की प्रक्रिया को स्थिर करने में मदद मिलेगी। 

वहीं, नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने भी दरों के स्थिर रहने की उम्मीद जताई है। बैजल के मुताबिक, “रियल एस्टेट सेक्टर के लिए ब्याज दरों का स्थिर रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि खरीदारों का रुझान सीधे तौर पर कर्ज की लागत से जुड़ा होता है। इससे घरों की मांग को समर्थन मिलेगा और बिक्री में तेजी बनी रहेगी”।

क्या अब वित्त वर्ष 2027 में ही बढ़ेंगी दरें?

भले ही मौजूदा नीतिगत बैठक में दरें स्थिर रहने की संभावना हो, लेकिन विशेषज्ञों ने भविष्य के लिए चेतावनी दी है। सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश जानकारों का अनुमान है कि बढ़ते महंगाई के जोखिमों को देखते हुए केंद्रीय बैंक वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) में बाद में नीति को फिर से कड़ा कर सकता है। इसके तहत, चालू वित्त वर्ष के दौरान कम से कम दो बार दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद है, और अगर महंगाई का दबाव तेज होता है तो यह आंकड़ा दो से भी अधिक हो सकता है।

कौन कर रहा है यह फैसला?

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की इस बैठक की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा कर रहे हैं। इस छह सदस्यीय समिति में अन्य पांच विशेषज्ञ- नागेष कुमार (निदेशक, आईएसआईडी), अर्थशास्त्री सौगत भट्टाचार्य, राम सिंह (निदेशक, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स), आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता और आरबीआई के कार्यकारी निदेशक इंद्रनील भट्टाचार्य शामिल हैं।



आरबीआई का शुक्रवार का फैसला न सिर्फ भारतीय बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर की दिशा तय करेगा, बल्कि बाजार के निवेशकों और आम आदमी की जेब पर भी सीधा असर डालेगा। बाजार की निगाहें अब पूरी तरह से इस बात पर टिकी हैं कि गवर्नर मल्होत्रा आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और महंगाई को नियंत्रित करने के बीच कैसे संतुलन बनाते हैं।

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