मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में रविवार को एक विवाद खड़ा हो गया, जब अहिल्याबाई होल्कर की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बीजेपी विधायक ने चंबल के पूर्व डकैत रामबाबू गड़रिया की तस्वीर पर भी माल्यार्पण कर दिया। यह कार्यक्रम पिछोर कस्बे में पाल-बघेल समाज द्वारा आयोजित किया गया था। मंच पर अहिल्याबाई होल्कर और रामबाबू गड़रिया दोनों की तस्वीरें रखी गई थीं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पिछोर विधायक प्रीतम लोधी ने दोनों तस्वीरों पर माला अर्पित की।
अहिल्याबाई होल्कर 18वीं सदी की होल्कर वंश की महारानी थीं और सुशासन व लोककल्याणकारी कार्यों के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। हालांकि, पूर्व डकैत की तस्वीर पर माल्यार्पण को लेकर बाद में विवाद शुरू हो गया। विधायक प्रीतम लोधी ने कहा कि गड़रिया उनके “सुख-दुख के साथी” रहे हैं और उन्होंने उनके जीवन के संघर्षों को करीब से देखा है। उन्होंने कहा कि समाज और परिस्थितियों ने उन्हें अपराध की राह पर धकेला। लोधी ने कहा कि अगर परिस्थितियां प्रतिकूल न होतीं तो वह डकैत नहीं बनते। उन्होंने यह भी कहा कि अपराधी और डकैत भी इंसान होते हैं और उनके जीवन की परिस्थितियों को समझने की जरूरत है।
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क्या बोले विधायक लोधी?
विधायक ने दावा किया कि वह गड़रिया के जीवन से जुड़ी कई घटनाओं के गवाह रहे हैं और उनसे जेल तथा जंगल दोनों जगह मुलाकात कर चुके हैं। इस घटना के बाद कई लोगों ने सवाल उठाया कि भारत की सबसे सम्मानित ऐतिहासिक हस्तियों में से एक अहिल्याबाई होल्कर को समर्पित कार्यक्रम में अपराध जगत से जुड़े व्यक्ति को सम्मानित करना कितना उचित है। कांग्रेस के स्थानीय अध्यक्ष साहब सिंह कुशवाह ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि किसी कुख्यात अपराधी की तस्वीर को एक पूजनीय व्यक्तित्व की तस्वीर के साथ मंच पर रखना गलत है। उन्होंने कहा कि समाज ऐसे महापुरुषों को इसलिए याद करता है ताकि लोग उनसे प्रेरणा लें। ऐसे में किसी अपराधी की तस्वीर पर माल्यार्पण कर विधायक क्या संदेश देना चाहते हैं? क्या वे चाहते हैं कि लोग अपराधियों को आदर्श मानें?