
RBI New Proposal: RBI यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से समय- समय पर फ्रॉड और स्कैम रोकने के लिए नए- नए तरीके आजमाए जाते रहे हैं. इसी कड़ में हाल ही में ऑनलाइन फ्रॉड रोकने के लिए RBI ने बड़े डिजिटल ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे की देरी लागू करने का प्रस्ताव दिया है. लेकिन RBI के इस प्रस्ताव पर कई बैंकों ने चिंता जाहिर की है.
क्या कहना है बैंकों का?
कई बैंकों का कहना है कि RBI द्वारा तय की गई 10,000 रुपये की लिमिट बहुत कम है. उनका मानना है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 25,000 रुपये किया जाना चाहिए. बैंक के कर्मचारियों के मुताबिक, 10,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे की देरी से UPI और ऑनलाइन पेमेंट की रफ्तार प्रभावित हो सकती है.
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एनडीटीवी प्रॉफिट के साथ बातचीत में एक वरिष्ठ सरकारी बैंक अधिकारी ने कहा कि इमरजेंसी पेमेंट और टैक्स से जुड़े ट्रांजैक्शन को इस नियम से बाहर रखा जाना चाहिए. साथ ही कुछ छोटे और कम तकनीकी क्षमता वाले बैंकों के लिए किल स्विच जैसी सुविधा लागू करना मुश्किल हो सकता है.
क्या था RBI का प्रपोजल?
बता दें कि RBI ने पिछले महीने साइबर फ्रॉड रोकने के लिए एक चर्चा पत्र जारी किया था. इसमें चार बड़े सुझाव दिए गए थे, जिसमें:
- बड़े ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे की देरी
- हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन के लिए एक्स्ट्रा सुरक्षा जांच
- केवल भरोसेमंद खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की अनुमति
- ग्राहकों को बड़े डिजिटल ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त कंट्रोल देना
RBI के इस फैसले के बाद पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि 25 लाख से ज्यादा रकम पाने वाले खातों की अलग जांच वाला नियम भी व्यवहारिक नहीं है. फ्रॉड करने वाले लोग कई छोटे खातों का इस्तेमाल कर इस नियम से बच सकते हैं. भारत में डिजिटल फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. साल 2025 में डिजिटल धोखाधड़ी के करीब 28 लाख मामले सामने आए, जबकि 2024 में ये दर 24 लाख थी. वहीं फ्रॉड की रकम बढ़कर लगभग 22,931 करोड़ पहुंच गई.
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