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जनजातीय संस्कृति समागम:अमित शाह बोले- जनजातीय समाज देश की सांस्कृतिक आत्मा, विकास की मुख्यधारा से जोड़ना प्रण – Amit Shah Said In Tribal Culture Conference Tribal Society Is Cultural Soul Of Country

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लाल किला मैदान में रविवार को आयोजित जनजातीय सुरक्षा मंच के जनजातीय संस्कृति समागम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनजातीय समाज को देश की सांस्कृतिक पहचान और विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के संकल्प पर काम कर रही है। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित इस विशाल समागम में देशभर से पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे जनजातीय समुदायों की उपस्थिति ने आयोजन को सांस्कृतिक महाकुंभ का स्वरूप दे दिया।

इस मौके पर अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा को नहीं देखा, लेकिन इस महाकुंभ में उमड़े जनसमुदाय में उन्हें बिरसा मुंडा की आत्मा और उनका संघर्ष जीवंत दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि देश को जोड़ने वाला बड़ा आंदोलन है। शाह ने जनजातीय समाज की जीवनशैली को प्रकृति के साथ संतुलन और स्थायी विकास का आदर्श बताते हुए कहा कि जल, जंगल और जमीन से जुड़ा उनका जीवन भारत की सबसे बड़ी सस्टेनेबल परंपरा है।

गृह मंत्री ने अपने भाषण में मतांतरण के मुद्दे पर भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था और परंपराओं के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार देता है, लेकिन लोभ, लालच और दबाव के जरिए मतांतरण स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सुनियोजित प्रयास के तहत जनजातीय समाज को उसकी सांस्कृतिक जड़ों से अलग करने की कोशिश की जाती रही है। रामायण के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि भगवान राम ने शबरी के बेर स्वीकार कर और निषादराज के चरणों का सम्मान कर यह संदेश दिया था कि वनवासी समाज और सनातन परंपरा अलग नहीं, बल्कि एक ही सांस्कृतिक चेतना के अंग हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज को मुख्यधारा से अलग बताने का प्रयास इतिहास और भारतीय संस्कृति की मूल भावना के विपरीत है।

अमित शाह ने छत्तीसगढ़ और बस्तर क्षेत्र में माओवादी हिंसा का उल्लेख करते हुए कहा कि दशकों तक हिंसा ने जनजातीय इलाकों के विकास को बाधित किया। उन्होंने दावा किया कि माओवाद के कारण हजारों जनजातीय लोगों की जान गई, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। शाह ने बताया कि जिन क्षेत्रों में पहले सुरक्षा बलों के कैंप थे, वहां अब “बलिदानी वीर गुंडाधूर सेवा डेरा” विकसित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, कौशल विकास और सरकारी योजनाओं की सुविधाएं लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं।

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर उठ रही आशंकाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में लागू यूसीसी में जनजातीय परंपराओं और अधिकारों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इससे जनजातीय समाज की सामाजिक व्यवस्था या परंपराओं से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। साथ ही उन्होंने पेसा कानून, एकलव्य मॉडल स्कूल, मुफ्त राशन, आवास योजनाओं और बढ़े हुए जनजातीय कल्याण बजट का उल्लेख करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने जनजातीय विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान जहां जनजातीय कल्याण बजट करीब 28 हजार करोड़ रुपये था, वहीं अब इसे बढ़ाकर डेढ़ लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाया गया है।

समागम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेशराम भगत ने की। इससे पहले अजमेरी गेट, रामलीला मैदान, राजघाट, श्री श्याम गिरी मंदिर और कश्मीरी गेट स्थित कुडेसिया पार्क से निकली शोभायात्राएं लाल किला मैदान पहुंचीं। मैदान में लगे सांस्कृतिक मंचों पर विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य और लोक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं।

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