- ईरान के विदेश मंत्री ने भारत की शांति भूमिका की सराहना की।
- ईरान भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को अत्यधिक महत्व देता है।
- ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका पर अविश्वास जताते हुए कूटनीति पर जोर दिया।
- ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नीतियों को असुरक्षा का कारण बताया।
Middle East Conflicts: ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शुक्रवार (15 मई, 2026) को अमेरिका और इजरायल के साथ पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और तनाव के बीच भारत की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत इलाके में शांति स्थापित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. हम भारत की किसी भी सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका की सराहना करते हैं.
उन्होंने पाकिस्तान की मेजबानी में हुई शांति वार्ता की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता से हमें कोई फायदा नहीं हुआ. हम किसी भी समझौते तक इसलिए नहीं पहुंच सके क्योंकि अमेरिका लगातार दबाव वाला रुख अपना रहा था और बार-बार अपने लक्ष्यों में बदलाव कर रहा था. उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी तभी हो सकती थी, जब ईरान की चिंताओं का समाधान किया जाता.
भारत को लेकर क्या बोले ईरानी विदेश मंत्री?
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने आए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार (15 मई, 2026) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हम भारत सरकार और उन सभी देशों की सराहना करते हैं, जिन्होंने हम पर हुए हमले की निंदा की और एकजुटता दिखाई.
उन्होंने कहा कि भारत के दुनिया के कई देशों के साथ रिश्ते हैं, लेकिन ईरान के लिए सबसे महत्वपूर्ण भारत और ईरान के बीच का संबंध है. हम भारत के साथ अपने रिश्तों को बहुत महत्व देते हैं. दोनों देशों के रिश्ते आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित हैं. उन्होंने आगे कहा कि अगर भारत ईरान से ईंधन की खरीदारी करना चाहता है तो ईरान भारत को ऊर्जा संसाधन उपलब्ध करान के लिए तैयार है.
यह भी पढे़ंः अमेरिका-ईरान जंग पर भारत को लेकर रूस का बड़ा बयान, ऐसा क्या कहा कि पाकिस्तान को लग जाएगी मिर्ची
ईरान को अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं- अराघची
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल पर निशाना साधते हुए कहा, ‘ईरान एक बिना उकसावे की आक्रामक कार्रवाई (Act of Aggression) का शिकार हुआ है और यह हमला ऐसे समय में हुआ, जब बातचीत और कूटनीतिक प्रयास जारी थे. उन्होंने कहा कि ईरान हमेशा से कूटनीति में विश्वास करता आया है. हम कूटनीति को मौका देना चाहते हैं. इसका कोई सैन्य समाधान नहीं है.
उन्होंने कहा कि हमने हमेशा कूटनीति का जवाब कूटनीति से दिया है, लेकिन सच्चाई यह है कि हमें अमेरिका पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है. हम अमेरिका पर भरोसा नहीं कर सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘हमारे पास अमेरिका पर भरोसा न करने की सभी कारण मौजूद हैं, जबकि अमेरिका के पास हम पर भरोसा करने की हर वजह है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘पिछली बार भी पांच दौर की बातचीत के बाद हमला किया गया था, जिसके बाद 12 दिनों तक युद्ध चला. इस बार भी वही दोहराया गया. यही वजह है कि अमेरिका पर भरोसा करना हमारे लिए बेहद मुश्किल है.’
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में असुरक्षा की स्थिति US की वजह से- अराघची
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं चाहता था. हम कई बार कह चुके हैं कि हम परमाणु हथियार नहीं चाहते और यह हमारी नीति का हिस्सा नहीं है. हमारा परमाणु कार्यक्रम सिर्फ शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.
उन्होंने कहा कि जहां तक ईरान का सवाल है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला हुआ है, बशर्ते वहां से गुजरने वाले जहाज उन देशों से संबंधित न हों, जो ईरान के खिलाफ लड़ाई में शामिल हैं. उन्होंने दावा किया कि ईरान ने भारत के जहाजों को स्ट्रेट से सुरक्षित रूप से गुजरने में मदद की, लेकिन इस क्षेत्र में असुरक्षा की स्थिति अमेरिका की वजह से पैदा हुई है.
यह भी पढे़ंः डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे और राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात पर अब आया रूस का बयान, जानें क्या कहा


