Economic Strain In Pakistan: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ युद्ध वाले देशों तक सीमित नहीं रह गया है. ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव ने दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. भारत पर तो इसका असर दिख ही रहा है, लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान पर भी इसका कहर साफ नजर रहा है. वैसे तो पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट, महंगाई और विदेशी कर्ज के दबाव से जूझ रहा था और अब ऐसे में तेल और सोने की बढ़ती कीमतों ने वहां रह रहे आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. पाकिस्तान में हालत किस कदर बिगड़ी है और इससे निपटने के लिए वहां क्या- क्या उपाय किए जा रहे हैं, ये आप यहां से जान सकते हैं.
क्यों है पाकिस्तान परेशान?
दरअसल, जैसे ही युद्ध या तनाव बढ़ता है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और सोने की कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं. निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की तरफ भागते हैं, जबकि तेल सप्लाई को लेकर डर पैदा हो जाता है. पाकिस्तान जैसे देश, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, उन पर इसका सीधा असर पड़ता है. पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर चल रही थीं. अब वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने से सरकार पर दबाव और बढ़ गया है. ऐसे में आम आदमी के लिए सड़क पर गाड़ी चलाना काफी ज्यादा मुश्किल हो गया है.
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क्या है पाकिस्तान की स्ट्रैटेजी?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार इन हालातों में सुधार लाने के लिए लगातार तेल कंपनियों और आर्थिक सलाहकारों के साथ बैठक कर रही है ताकि कीमतों को पूरी तरह बेकाबू होने से रोका जा सके. हालांकि, राहत की गुंजाइश कम दिखाई दे रही है, क्योंकि पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी बहुत मजबूत स्थिति में नहीं हैं. ऐसे में आम लोगों की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ी है. कराची, लाहौर और इस्लामाबाद जैसे शहरों में लोग सोशल मीडिया पर बढ़ती महंगाई को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. कई जगहों पर लोग यह तक कह रहे हैं कि अब रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है. पेट्रोल महंगा होने का असर सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ट्रांसपोर्ट, सब्जियां, राशन और बाकी जरूरी सामान भी महंगे हो जाते हैं.
क्या पाकिस्तान में सोना खरीद रहे हैं लोग?
सोने की बात करें तो पाकिस्तान में इसकी कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है. शादी का सीजन हो या निवेश, दोनों पर खूब असर पड़ा है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कई ज्वेलर्स ने ये दावा किया है कि अब पाकिस्तान में ग्राहक सोने की खरीदारी कम कर रहे हैं और लोग पुराने गहने बेचने ज्यादा पहुंच रहे हैं. कह सकते हैं कि पाकिस्तान में अब मिडिल क्लास के लिए सोना धीरे-धीरे लग्जरी बनता जा रहा है.
साऊदी और आईएमएफ ने की मदद
फिलहाल पाकिस्तान की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था को बाहरी संकटों से कैसे बचाए. ईरान युद्ध संकट को देखते हुए पाकिस्तान सरकार फिलहाल बचाव की रणनीति पर काम कर रही है. सरकार ऊर्जा बचत, आयात नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दे रही है. वहीं, इसी बीच खबर आई कि पाकिस्तान को दिवालिया होने से बचाने के लिए सऊदी अरब और IMF ने बड़ी आर्थिक मदद की है. सऊदी अरब ने 3 अरब डॉलर की नई वित्तीय सहायता और 5 अरब डॉलर के लोन की अवधि बढ़ाई है, जबकि IMF ने 7 अरब डॉलर के कार्यक्रम के तहत 1.32 अरब डॉलर की किश्त मंजूर की है.
पाकिस्तान में पेट्रोल डीजल और सोना की खपत अब कितने हो रही है?
13 मई, बुधवार को पाक में पेट्रोल की कीमतें 414 रुपये के पार चली गई, जिससे लोग काफी परेशान हैं. असल में पाकिस्तान में पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की संयुक्त दैनिक खपत लगभग 5.88 करोड़ लीटर है. वार्षिक रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान में कच्चे तेल की कुल खपत लगभग 4.5 लाख से 4.8 लाख बैरल प्रति दिन है, जो प्रति व्यक्ति के हिसाब से मात्र 0.08 गैलन प्रतिदिन बैठती है. वहीं, बात करें सोने की तो पाकिस्तान में सोने के बिस्कुट और सिक्कों की निवेश मांग प्रति तिमाही लगभग 4.5 से 4.8 टन के आसपास रहती है. लेकिन अब ये आकड़ा भी काफी गिर चुका है.

