कहने को यह भागलपुर को शेष बिहार से जोड़ने वाला पुल था, लेकिन यह पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और झारखंड की गाड़ियों के लिए भी जरूरत था। रविवार मध्य रात्रि के बाद गंगा में विक्रमशिला सेतु के समाते ही अब इन राज्यों की गाड़ियों के लिए भी मुसीबत का दौर शुरू हो गया है। विक्रमशिला सेतु के समानांतर पुल का इंतजार वर्षों से हो ही रहा है, इसलिए फिलहाल इन राज्यों को भी रूट समझना होगा कि अब विकल्प क्या है?
यूपी से आने वाली गाड़ियों के लिए क्या है रास्ता
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज, पडरौना, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, देवरिया, गाजीपुर आदि के रास्ते बिहार में प्रवेश करने वाली गाड़ियां बिहार में गोपालगंज या बक्सर के रास्ते घुसें या सीवान या फिर पश्चिम चंपारण के रास्ते; इनके पास झारखंड के देवघर, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज आदि जाने के लिए नवगछिया-भागलपुर को जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु का ही रास्ता आसान दिखता था। कुछ साल पहले जब खगड़िया में मल्हीपुर के पास से गंगा नदी पर पुल बना तो मुंगेर होकर रास्ता कुछ आसान हुआ। इस रास्ते में आबादी वाले क्षेत्र ज्यादा हैं, इसलिए हाइवे-हाइवे वाले विक्रमशिला सेतु का विकल्प बेहतर होता था। अब यह विकल्प खत्म हो गया है। अब सभी गाड़ियों को खगड़िया आना ही पड़ेगा, चाहे बेगूसराय होकर आएं या किसी दूसरे रास्ते से।
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पश्चिम बंगाल से आने वाली गाड़ियों के लिए रास्ता
अब तक पश्चिम बंगाल से आने वाली गाड़ियां किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार के रास्ते भागलपुर के नवगछिया से विक्रमशिला सेतु होकर भागलपुर शहर में घुसते हुए बांका होकर झारखंड के देवघर, साहिबगंज, गोड्डा, पाकुड़ आदि जिलों का रुख करती थीं। अब इनके पास भी नवगछिया से आगे खगड़िया जाने का ही रास्ता है। इन्हें उस हिसाब से थोड़ा लंबा भी रास्ता तय करना होगा और आवासीय क्षेत्र वाले रूट के कारण परेशानी भी झेलनी पड़ेगी।


