तीस हजारी कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के दो अधिकारियों को 26 साल पुराने मामले में दोषी ठहराते हुए तीन-तीन महीने की कैद की सजा सुनाई है। मामला वर्ष 2000 में भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल के पश्चिम विहार स्थित आवास पर बिना वैध कागजात के छापा डालने और मारपीट से जुड़ा है।

अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास) शशांक नंदन भट्ट ने सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी वीके पांडे और वर्तमान में सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर पद पर कार्यरत रामनीश (तत्कालीन डीएसपी) को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 448 (घर में अनधिकृत प्रवेश) और 427 (क्षति पहुंचाना) के साथ धारा 34 (साझा इरादा) के तहत दोषी करार दिया था। अदालत ने इसे कानून की ओर से प्रदत्त शक्तियों का घोर उल्लंघन माना।
यह है मामला
19 अक्टूबर 2000 को सीबीआई की टीम ने सुबह-सुबह आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल के घर पर छापा मारा था। शिकायतकर्ता अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि दोनों अधिकारियों ने बिना उचित अधिकार के उनके घर का मुख्य दरवाजा तोड़कर जबरन घुसपैठ की और मारपीट करके संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। अदालत ने फैसले में कहा कि यह छापा और गिरफ्तारी पूरी तरह दुराग्रहपूर्ण थी और दोनों अधिकारियों ने आधिकारिक शक्तियों का दुरुपयोग कर पेशेवर दुश्मनी निपटाने की कोशिश की।

