पश्चिम बंगाल में चुनाव के साथ मनोवैज्ञानिक जंग भी छिड़ी है। सियासी खेला में क्रिकेट की भाषा में इस जंग का नाम है नर्वस 90 सिंड्रोम। पहले चरण की 152 सीटों पर हुए रिकॉर्ड तोड़ मतदान ने राजनीति के स्थापित समीकरणों को हिला कर रख दिया है। पिछले चुनाव से करीब 10% ज्यादा मतदान 92 प्रतिशत के करीब पहुंचने के संकेत दे रहा है।
यह सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि बंगाल की सत्ता के भविष्य का वह सुपर ओवर है, जहां हर गेंद पर नतीजा बदल रहा है। यह बंगाल के चुनावी इतिहास में एक ऐसा मोड़ है, जहां वोट की चोट का शोर पूरे देश में सबसे ज्यादा सुनाई दे रहा है।
बंगाल में बदला मतदान का रक्तचरित्र
सबसे बड़ी बात तो मतदान का रक्तचरित्र बदलना है। बंगाल में चुनाव और हिंसा अक्सर एक-दूसरे के पर्याय रहे हैं। 2021 के विधानसभा चुनावों में करीब 60 लोगों की जान गई थी। चुनाव आयोग पर तमाम हमले हुए, लेकिन इस बार पहले चरण में मतदान का स्वरूप तुलनात्मक रूप से बेहद शांतिपूर्ण रहना उसके फैसलों को सही ठहराता नजर आ रहा है।
इक्का-दुक्का झड़पों को छोड़ दें, तो शांतिपूर्ण वोटिंग भाजपा के लिए सियासी रूप से मनोवैज्ञानिक बढ़त मानी जा रही है, क्योंकि भगवा खेमा लगातार भयमुक्त मतदान की मांग करता रहा है। ममता के बंगाली अस्मिता कार्ड के सामने भाजपा का नारा भय या भरोसा रहा है। अपेक्षाकृत नाममात्र की हिंसा से भाजपा को दूसरे चरण के लिए अपने काडर को सड़कों पर उतारने की ऊर्जा जरूर मिल गई है, जहां मुकाबला इस चरण से ज्यादा कड़ा है। बंगाल ने देश की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। 92% के आंकड़े ने पूरी सियासत को नर्वस कर दिया है। इतना कि चार मई तक कालीघाट से लेकर मुरलीधर लेन तक, हर रात बेचैनी भरी रहने वाली है।
ममता का डिफेंस…लक्ष्मी भंडार और युवा साथी
बढ़े मतदान को भले ही भाजपा सत्ता विरोधी लहर बता रही हो, लेकिन तृणमूल के पास लाभार्थी मतदाताओं की ऐसी फौज है, जो आंकड़ों का रुख मोड़ सकती है। ममता ने लक्ष्मी भंडार योजना की राशि बढ़ाकर सामान्य वर्ग के लिए 1500 और एससी-एसटी के लिए 1700 रुपये कर दिए हैं। राज्य की करीब 2.2 करोड़ महिलाएं इसकी लाभार्थी हैं। ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि महिलाएं इसे सरकारी मदद नहीं, बल्कि अपनी आर्थिक आजादी मान रही हैं। हालांकि, भाजपा 3000 के वादे से इसकी काट करने की कोशिश की है।
बेरोजगारी के आरोपों को काटने के लिए ममता ने युवा साथी योजना के तहत युवाओं को 1500 प्रति माह के भत्ते का कार्ड खेला है। पहले चरण की वोटिंग में युवाओं की लंबी कतारों को तृणमूल समर्थक इसी से जोड़ रहे हैं। हालांकि, इतने भर से युवा संतुष्ट होंगे, ग्राउंड रिपोर्ट इसकी तस्दीक नहीं करतीं।
असल परीक्षा…भाजपा के लिए सुपर ओवर
भाजपा के लिए यह पहला चरण किसी परीक्षा से कम नहीं है। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपनी कुल 77 सीटों में से 59 सीटें इसी 152 सीटों वाले इलाके से जीती थीं। यानी भाजपा की कुल ताकत का 75% भागीदारी इसी क्षेत्र में है। सत्ता की दहलीज तक पहुंचना है, तो यहां निर्णायक बढ़त अनिवार्य है। भाजपा का नारा भयमुक्त बंगाल इस बार जमीन पर दिखा। इस बार का शांतिपूर्ण मतदान भाजपा के पक्ष में एक मनोवैज्ञानिक बढ़त माना जा रहा है।
एसआईआर प्रक्रिया: बांग्ला मां बनाम डिजिटल सफाई
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एसआईआर को भले ही वोट चोरी और बांग्ला मां के अपमान के तौर पर पेश कर रही हैं, लेकिन मतदान से ये तो साफ हुआ है कि मालदा-मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में प्रति सीट करीब 50 हजार तक फर्जी नाम काटे गए हैं, जिसका नतीजा है कि मतदान प्रतिशत में कम से कम चार प्रतिशत बढ़ोत्तरी तो इसी वजह से हुई है।
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