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पहलगाम हमले की पहली बरसी: बैसरन घाटी बंद होने से 10 हजार करोड़ का नुकसान, CTI ने PM से लगाई गुहार

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Pahalgam Terror Attack 2025: कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल 22 अप्रैल को हुआ आतंकी हमला आज भी लोगों के जेहन में ताजा है. उस दिन आतंकवादियों ने बैसरन घाटी में आम नागरिकों को निशाना बनाते हुए करीब 26 लोगों की जान ले ली थी. खूबसूरत वादियां खून से लाल हो उठी थीं और पूरे देश को झकझोर देने वाली यह घटना आज एक साल बाद भी सवाल छोड़ रही है.

हमले के बाद सुरक्षा कारणों से बैसरन घाटी को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था, जो अब तक जारी है. इस बंदी का असर सीधे तौर पर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है. पहलगाम और आसपास के इलाकों में होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, टैक्सी, घोड़े और पोनी से जुड़े करीब 5000 परिवार आज भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं.

CTI ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, पुनर्समीक्षा की मांग

व्यापारियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने मांग की है कि बैसरन घाटी और आसपास के हालात की दोबारा समीक्षा की जाए. उनका कहना है कि अगर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मजबूत है, तो घाटी को फिर से पर्यटकों के लिए खोलने पर विचार होना चाहिए.

हालात सामान्य, शांति कायम- स्थानीय होटल एसोसिएशन

पहलगाम होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष जावेद बुर्जा ने CTI से संपर्क कर मौजूदा स्थिति की जानकारी दी है. उनके अनुसार क्षेत्र में अब पूरी तरह शांति है और हालात सामान्य हो चुके हैं. इसके बावजूद घाटी बंद रहने से स्थानीय कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.

सैलानियों की संख्या में भारी गिरावट

जावेद बुर्जा के मुताबिक, पिछले एक साल में पर्यटकों की संख्या घटकर सिर्फ 15 से 20 प्रतिशत रह गई है. इससे होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और अन्य पर्यटन आधारित कारोबार लगभग ठप हो गए हैं. उनका मानना है कि घाटी को दोबारा खोलने से पर्यटन को नई रफ्तार मिल सकती है.

10 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान

CTI के आंकलन के अनुसार, इस घटना के बाद कश्मीर में करीब 10 हजार करोड़ रुपए के कारोबार का नुकसान हुआ है. बृजेश गोयल का कहना है कि सरकार को सख्त सुरक्षा इंतजामों के साथ इलाके का निरीक्षण कराना चाहिए और संतुष्ट होने पर बैसरन घाटी को खोल देना चाहिए.

घाटी खुलने से जाएगा सकारात्मक संदेश

CTI का मानना है कि बैसरन घाटी को दोबारा खोलना न सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत संदेश होगा, बल्कि हमले में मारे गए लोगों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि भी होगी. इससे कश्मीर के पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र को नई जान मिलेगी और हजारों प्रभावित परिवारों को राहत मिल सकेगी.

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