
- तंबाकू छोड़ें, 2 करोड़ परिवार आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं।
- गरीब परिवार आय का 6.4% तंबाकू पर खर्च करते हैं।
- 26.7 करोड़ भारतीय तंबाकू का सेवन करते हैं।
- तंबाकू कैंसर, हृदय रोग का एक बड़ा कारण है।
Tobacco Poverty Trap: तंबाकू खाने वालो को एक नई रिसर्च चौंका सकती है. एक नई स्टडी के मुताबिक, अगर लोग तंबाकू पर खर्च करना बंद कर दें और बचे हुए पैसों को दूसरी जरूरी जरूरतों में लगाएं, तो करीब 2.04 करोड़ से ज्यादा परिवार अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं.
यह कुल घरों का लगभग 10.6 प्रतिशत हिस्सा होता है. यानी की सिर्फ अपनी खर्च करने की आदत बदलकर वे अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं.
क्या कहती है स्टडी?
यह स्टडी BMJ Global Health में छपी है. जिसे नोएडा स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (ICMR-NICPR) और मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के शोधकर्ताओं ने तैयार किया हैं. यह पहली बार है जब बड़े लेवल पर देशभर में तंबाकू का इस्तेमाल और उससे पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव को समझने की कोशिश की गई है.
स्टडी में यह भी सामने आया है कि सबसे गरीब परिवार अपनी कुल मासिक आय का करीब 6.4 फीसदी हिस्सा तंबाकू पर खर्च कर देते हैं. कम कमाई होने के बावजूद इस तरह का खर्च उनके रोजमर्रा के खर्चों पर असर डालता है. साथ ही इससे उनके घर का बजट भी बिगड़ता हैं.
तंबाकू बना गरीबी का जाल
रिसर्च के अनुसार तंबाकू सिर्फ सेहत के लिए ही नहीं, बल्कि जेब पर भी भारी पड़ता है. आंकड़ों की बात करें तो, करीब 2 करोड़ परिवार सिर्फ तंबाकू छोड़कर अपनी आर्थिक हालत सुधार सकते हैं. यह बहुत बड़ी संख्या है.
खासकर गांवों में रहने वाले परिवार, जो अपनी आय का करीब 7 प्रतिशत तक तंबाकू पर खर्च करते हैं. उनके लिए यह बदलाव काफी मददगार साबित हो सकता है. तंबाकू की आदत उन्हें गरीबी के जाल में फंसाए रखती है.
भारत में तंबाकू का इस्तेमाल
भारत में तंबाकू का इस्तेमाल बहुत बड़ी संख्या में लोग करते हैं. देश में करीब 26.7 करोड़ लोग इसका यूज करते हैं, जो वयस्क आबादी का लगभग एक चौथाई हिस्सा है. यही कारण है कि तंबाकू को देश में मौत का एक बड़ा कारण माना जाता है. जिससे हर साल 10 लाख से ज्यादा लोगों की जान चली जाती है.
सेहत पर गंभीर असर
तंबाकू कई गंभीर बीमारियों की वजह बनता है. यह मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर के साथ-साथ दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ाता है. लंबे समय तक इस्तेमाल गंभीर बीमारी के रूप में सामने आता है.
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