- अधिकारियों ने भीड़ और अशांति की आशंका को भी बताई वजह।
ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनई की हत्या के 7 हफ्ते बीत जाने के बाद भी अभी तक उनके अंतरिम संस्कार को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया है. इसके पीछे सुरक्षा चिंताओं के साथ-साथ कई अन्य चीजों को वजह बताया गया है.
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने बताया कि अयातुल्ला अली खामेनई के अंतिम संस्कार के पीछे सुरक्षा चिंताओं और लॉजिस्टिक चुनौतियों को मुख्य वजह बताया जा रहा है. ईरानी अधिकारी बड़े सार्वजनिक अंतिम संस्कार के आयोजन से जुड़े जोखिमों पर विचार कर रहे हैं, इसमें खासकर संभावित इजरायली हमलों और भारी भीड़ के दौरान अशांति की आशंका शामिल है.
ईरानी शासन डरा हुआ है- तालेब्लू
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के बेहनम तालेब्लू ने कहा कि मौजूदा हालात में सरकार ऐसा जोखिम उठाने से बच रही है. फाउंडेशन ने कहा, ‘आसान शब्दों में ईरानी शासन इतना डरा हुआ और कमजोर है कि वह दांव खेलने के लिए तैयार ही नहीं है. संघर्ष के बीच तेहरान कई तरह की कमजोरियों का सामना कर रहा है.’
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28 फरवरी को हवाई हमले में हुई थी खामेनेई की मौत
उल्लेखनीय है कि 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई की इस साल 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए संयुक्त हवाई हमले में मौत हो गई थी. खामेनेई की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और ज्यादा तीव्र हो गया. हालांकि, अब तक खामेनेई के शव को दफन नहीं किया गया है, जो इस्लामिक गणराज्य की परंपराओं से बिल्कुल उलट है.
मशहद में खामेनेई को किया जा सकता है दफन
रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारी खामेनेई के शव को दफनाने के लिए उनके होमटाउन मशहद को संभावित स्थान के रूप में देख रहे हैं. यह शहर इमाम रेजा दरगाह के लिए प्रसिद्ध है और यहां सुरक्षा व्यवस्था भी काफी मजबूत है. योजना है कि उन्हें दरगाह के पास ही दफनाया जाए, जहां भारी सुरक्षा तैनाती से स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
युद्ध और अनिश्चितता के बीच योजना स्थगित
ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, 4 मार्च से शुरू होने वाले तीन दिवसीय राजकीय अंतिम संस्कार की शुरुआती योजना को अमेरिका और इजरायल के बढ़ते हमलों के कारण रद्द कर दिया गया था. बाद में अधिकारियों ने कहा कि देरी का कारण अभूतपूर्व भीड़ की उम्मीद भी थी, लेकिन अभी तक कोई नई तारीख तय नहीं की गई है. यह अनिश्चितता ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अस्थायी सीजफायर इस हफ्ते समाप्त होने वाला है, जिससे किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन करना और भी मुश्किल हो गया है.
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