11:30 AM, 18-Apr-2026
हम महिला विरोधी नहीं है- खरगे
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि INDIA गठबंधन के सांसद महिला विरोधी नहीं हैं, बल्कि वे संविधान (131वां संशोधन) विधेयक और परिसीमन से जुड़े प्रावधानों का विरोध कर रहे हैं।
संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए खरगे ने आरोप लगाया कि केंद्र की एनडीए सरकार का उद्देश्य सत्ता हासिल कर भविष्य में परिसीमन कानून को साधारण बहुमत से बदलने का रास्ता बनाना है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से कांग्रेस सांसद लोकसभा में इस विधेयक और परिसीमन बिल का विरोध कर रहे हैं। खरगे ने कहा कि हम लंबे समय से एक-तिहाई महिला आरक्षण के पक्ष में रहे हैं। 2023 के संशोधन को हमने सर्वसम्मति से समर्थन दिया और पास किया। लेकिन उसके नाम पर सरकार ने एक और संशोधन लाकर उसमें परिसीमन का प्रावधान जोड़ दिया, जिससे दोनों मुद्दों को जोड़ दिया गया।
11:16 AM, 18-Apr-2026

दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के स्थगित कर दी। साथ ही राज्यसभा को भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। दरअसल, महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक शुक्रवार को लोकसभा से पास नहीं हो पाया।
11:07 AM, 18-Apr-2026

दोनों सदनों में कार्यवाही शुरू
संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू हो गई। आज विशेष सत्र का आखिरी दिन है।
10:51 AM, 18-Apr-2026
लोकसभा में बिल पास न होने पर सियासत तेज, कांग्रेस बोली- सरकार की योजना फेल
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के लोकसभा में पारित न हो पाने पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने की सरकार की रणनीति विफल हो गई है। उन्होंने कहा कि हम पहले ही 2023 का महिला आरक्षण कानून सर्वसम्मति से पास कर चुके हैं। अब सरकार को तुरंत कदम उठाते हुए इसे 2029 के चुनाव से पहले लागू करना चाहिए। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार ने महिला आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की।
10:12 AM, 18-Apr-2026
Parliament Session LIVE: संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, नहीं पास हो सका संविधान संशोधन विधेयक
लोकसभा में शुक्रवार शाम महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक पर मतदान हुआ था, जिसमें कुल 528 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इनमें 298 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विरोध में मतदान किया। हालांकि, ओम बिरला ने स्पष्ट किया था कि यह विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका, जिसके चलते इसे पारित नहीं माना गया।
